डा0 ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि “स्मृति दिवस” के रूप में मनाई गई The death anniversary of Dr. A.P.J. Abdul Kalam was celebrated as "Memorial Day"



गाजियाबाद, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )   “लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट” द्वारा आयोजित भारत के पूर्व राष्ट्रपति, मिसाइल मैन, भारतरत्न डा0 ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम जी की पुण्यतिथि “स्मृति दिवस” के रूप में आयोजित की गयी।  कार्यक्रम के संयोजक रामदुलार यादव, मुख्य अतिथि राजकुमार जैन समाजवादी चिन्तक, अध्यक्षता अन्तराष्ट्रीय विषयों के मर्मज्ञ श्री कुलदीप तलवार जी, सम्मानित अतिथि डा0 विशन लाल गौड़, डा0 सभापति शास्त्री, स्वागताध्यक्ष वीरेन्द्र यादव एडवोकेट रहे। संचालन पण्डित मुकेश शर्मा शिक्षाविद ने किया। समारोह में उपस्थित शिक्षाविद विद्वानों ने भी विचार व्यक्त किया। 
   
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि राजकुमार जैन समाजवादी चिन्तक ने कहा कि डा0 अब्दुल कलाम का जीवन कठिनाइयों से भरे होने के बाद भी सफलता की मिशाल है। आप ने अपनी मेहनत, त्याग, तपस्या से देश के सर्वोच्च पद को सुशोभित किया, आप की न कोई जाति थी न कोई धर्म आप राष्ट्र को सर्वोच्च धर्म मानते थे, तथा देश को विकसित देशों की श्रेणी में लाना चाहते थे। आप का सपना जिसे आप साकार देखना चाहते थे कि 2020 तक भारत विश्व के विकसित देशों में शामिल हो क्योंकि भारत की मिट्टी ऐसे सपूतों को पैदा करती है जो देश में राजनीतिक, सामाजिक सद्भाव के द्वारा देश को आगे बढ़ाने तथा समाज को जोड़ने का काम करते हैं। 
   
कार्यक्रम के संयोजक रामदुलार यादव ने कहा कि आज वर्तमान राजनीति की दिशा बदली हुई है धनबल, बहुबल राजनीति को प्रभावित कर रहा है। राजनेताओं को महाझूठ बोलने में भी शर्म महसूस नहीं होती है, सार्वजानिक जीवन में ईमानदारी से कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को पीछे धकेल दिया जाता है, लम्पट, वाचाल व झूठे, बेशर्मी मैदान में डटे हुए है। ं जनता के धन का दुरपयोग हो रहा है। डा0 अब्दुल कलाम साहब के विचार आचरण को जीवन में उतारकर ही राजनीति में शुचिता आ सकती है, जैसे अपने रिश्तेदारों की मेहमान नवाजी में व्यय हुए साढ़े तीन लाख रुपये (रु0 350000) आपने निजी बैंक खाते से भुगतान किया, जब की वह सरकारी खजाने से भी भुगतान कर सकते थे, आज छोटे से छोटे अधिकारी, राजनेता भी जिन्हें थोड़े से अधिकार मिले हुए, निजी लाभ के लिए सरकारी संसाधनों का दुरपयोग करते नहीं चूकते। इस प्रवृति को बदलने की आवश्यकता है। हमें इस अवसर पर कलाम साहब के विचार व आचरण से प्रेरणा लेकर संकल्प लेना है कि हम राजनीति में शुचिता लाने के लिए संघर्ष करेंगें तथा कलाम साहब के सपनों को साकार करने के लिए प्रयत्नशील रहेंगें यही कलाम साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
  
 डा0 विशन लाल गौड़ पूर्व प्राचार्य ने कहा कि मै कलाम साहब को सलाम करता हूँ जिन्होनें दुश्मन का विनाश करने के लिए मिसाइल तैयार की। मै शिक्षक रहा हूँ मैंने वह मिसाइल तैयार की जो करुणा व दया से समाज में सद्भाव, भाईचारा स्थापित करें तथा सांप्रदायिक व सामन्ती ताकतों का विनाश कर सकें।
    
कुलदीप तलवार साहब अध्यक्षीय भाषण में कार्यक्रम में आये हुए सभी भाइयों व बहनों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि आज की राजनीति झूठ, फरेब व भ्रष्टाचार की जननी बन गयी है इसे कलाम साहब जैसे महा मानव के आचरण पर चलने वाले देशवासी ही नई दिशा दे सकते हैं। कलाम साहब वैज्ञानिक, राजनेता, युवाओं के प्रेरणा स्रोत रहे। आप कविता के माध्यम से भी समाज को शिक्षित करते रहे, युवाओं को संघर्षरत रहकर मेहनत के बल पर अपने जैसा सफल देखना चाहते थे।
   स्मृति दिवस समारोह को डा0 सभापति शास्त्री, चैधरी अलीमास, इरशाद भाई, अमरुद्दीन नेता जी, सूफी शादाब भाई, सरदार जगतार सिंह भट्टी, शिव दत्त शर्मा, साजिद चैधरी, तराबुद्दीन, रोजुद्दीन, बशीरुद्दीन ईशाक अली, माजिद भाई, साहिल नेता जी ने भी सम्बोधित किया, रहमत अली, पण्डित विनोद त्रिपाठी ने कलाम साहब के सम्मान में गीत प्रस्तुत किया, निगार फारुखी सहित सैकड़ों भाई, बहनों ने स्मृति दिवस में भाग लेकर डा0 अब्दुल कलाम साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें स्मरण किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से  पं0 कृष्ण कुमार दीक्षित, डा0 देवकर्ण चैहान, रितु खन्ना, बिन्दू राय, अनीता सिंह, संजू शर्मा, वीर सिंह सैन, हाजी मोहम्मद सलाम, फौजुद्दीन, भीम सिंह चैहान, मुनीव यादव, के0 के0 यादव, रवीश यादव, एस0 एन0 जायसवाल, शिव शंकर शर्मा, देव नाथ भारती, अनिल मिश्र, राज पाल यादव, आशा कुशवाहा एडवोकेट, मीरा तिवारी, रूबी जी, रमेश गौतम, सुखविंदर सिंह विरधी, सरदार अवतार सिंह काले, दिलबाग सिंह, सुरजीत सिंह, सी0 पी0 सिंह, जिनेश सैन, हीरा लाल  सैन, विजय बाबू, दिलशाद भाई, रेनुका अरोड़ा, एम0 एम0 खान, राजेश कश्यप, श्रीपाल कश्यप ठेकेदार, सुन्दर लाल, अमीर रजा, राम नरेश यादव, अवधेश यादव, सुरेन्द्र यादव, चैधरी नूर हसन, नबाबुद्दीन, ओम प्रकाश अरोड़ा, प्रभा शंकर मिश्र, अमर बहादुर, सुभाष यादव, राजीव गर्ग, हरिशंकर यादव, सुरेश भारद्वाज, प्रेम चन्द पटेल, अरुण पटेल, केदार सिंह, अर्जुन सिंह आदि शामिल रहे तथा हजारों लोगों ने भोजन-भण्डारे में प्रसाद ग्रहण किया। 



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