गुड़गाँव में महिला घरेलू कामगार के साथ हुए यौन शोषण की जी.के.यू ने की भर्त्सना GKU condemns sexual abuse of women domestic workers in Gurgaon



  • कानून द्वारा जरूरी होने के बावजूद हाऊसिंग सोसाइटियों में आंतरिक शिकायत कमिटियों का गठन नहीं सुनिश्चित किये जाने की भर्त्सना की
  • घरेलू कामगारों के साथ यौन-शोषण की रिपोर्ट नहीं करने के लिए स्थानीय थानों और आर.डब्ल्यू.ए के खिलाफ सख्त कार्रवाई किये जाने की भी उठायी मांग
  • जी.के.यू मामले में हस्तक्षेप कर पीड़िता को दिलाएगा न्याय


नई दिल्ली, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )  घरेलू कामगार यूनियन (जी.के.यू) हाल में सेक्टर-51, गुड़गाँव में घरेलू कामगार के साथ हुए यौन शोषण और बलात्कार की घटना की कड़ी भर्त्सना करता है। मालिकों और घरेलू कामगारों के गैर-बराबर संबंधों के चिंतित करने वाले पहलुओं के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में कार्यरत, जी.के.यू पिछले काफी समय से संघर्षरत है। इन पहलुओं में घरेलू कामों का व्यापक स्तर पर यौन उत्पीड़न और शोषण  शामिल है।  

इस मामले में महिला कामगार अपने मालिक के घर पर काम छोड़ने के बाद ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकी। इससे यह साफ ज्ञात होता है कि दिल्ली-एनसीआर की हाऊसिंग सोसाइटियों में घरेलू कामगारों का शोषण और यौन-उत्पीड़न एक व्यापक समस्या है। ज्ञात हो कि 2013 के काम की जगहों पर यौन शोषण के कानून के बाद से हर काम की जगह पर आंतरिक शिकायत कमिटी (आई.सी.सी) बनाना जरूरी है। मगर, आज तक इस कानून के तहत दिल्ली-एनसीआर की किसी भी सोसाइटी में इन कमिटियों का गठन नहीं हुआ है। इस कारण, घरेलू कामगारों जिनमे ज्यादातर महिलाएँ हैं, उनका खुलेआम उत्पीड़न और यौन-शोषण जारी है।  

ज्ञात हो कि ज्यादातर ऐसे मामलों में जहाँ घरेलू कामगारों का यौन शोषण, उत्पीड़न होता है वहाँ सोसाइटी मालिकों का ही पक्ष लेकर मामलों को दबाने की कोशिश करती हैं। या वो तब ही इस मामले को पुलिस में रिपोर्ट करती है जब मामले को दबाया जाना नामुमकिन बन गया हो। आम तौर पर, घरेलू कामगारों की रोजमर्रा की समस्याओं जैसे घरेलू कामगारों का मालिकों द्वारा यौन-शोषण या पिटाई किया जाना, बाल श्रमिकों से काम करवाया जाना, घरेलू कामगारों को वेतन न दिया जाना, और उन कामगारों की ‘नो एंट्री’ करवाना जो मालिकों के उत्पीड़न के खिलाफ बोलते हैं, के खिलाफ सोसाइटी द्वारा कुछ नहीं बोला जाता है। साथ ही, स्थानीय पुलिस भी घरेलू कामगारों की शिकायतों की ज्यादातर अनदेखी करती है, और जब मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी करती है तो वो इतनी लचर होती है कि मालिकों को आसानी से जमानत मिल जाती है।

घरेलू कामगारों की व्यापक उत्पीड़न और यौन-शोषण वाली स्थिति, और मालिकों, सोसाइटी और स्थानीय पुलिस के गठजोड़ के खिलाफ जी.के.यू घरेलू कामगारों को संगठित करने के लिए प्रयासरत है।  साथ ही, वो इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित घरेलू कामगार को न्याय पाने के संघर्ष में मदद करेगा।




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