लाजपत राय कॉलेज के प्रधानाचार्य की मुश्किलें बढ़ी Lajpat Rai college Principal raised problems



                                                     मृतक इलेक्ट्रिशियन की विधवा गीता उर्फ रूपा।

साहिबाबाद ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )  लाजपत राय महाविद्यालय साहिबाबाद के प्रधानाचार्य और हैड क्र्लिक की मुश्किलें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गाजियाबाद  की अदालत केे नए आदेश के बाद बढ़ गई हैं । अदालत ने कॉलेज के  एक पूर्व कर्मचारी की आत्महत्या के मामले में दोनों लोगों के खिलाफ थाना साहिबाबाद में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने वाली रिपोर्ट की पुरानी विवेचना को रद्द करते हुए विवेचना को दोबारा से करने के आदेश थानाध्यक्ष साहिबाबाद व एसएसपी गाजियाबाद को दिए हैं।
           
जानकारी के अनुसार 9 अप्रैल 2016 को लाजपत राय कॉलेज के इलेक्ट्रीशियन रंजीत झा ने अपने घर में साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में मृतक की जेब से मिले एक सुसाइड नोट के आधार पर थाना साहिबाबाद में लाजपत राय कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर संजय दत्त कौशिक और हेड क्लर्क भूदेव शर्मा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज हुआ था । इस मामले  की जांच थाने के उप निरीक्षक विजय कुमार यादव ने  की और कुछ लोगों के बयानों के आधार पर उसे मानसिक रोगी दर्शाते हुए  दोनों लोगों को आरोप से बरी कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। 
       
इस मामले में मृतक रंजीत झा की विधवा गीता उर्फ रूपा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और रूपा के अधिवक्ता रवीश शर्मा ने अदालत के सामने दलीलें रखीं कि  विवेचक विजय कुमार यादव ने मामले की  फाइनल रिपोर्ट आरोपियों से साज कर षड्यंत्र के तहत लगाई है। उधर आरोपयिों ने मृतक के एक  रिश्तेदार जो कालेज में ही नौकरी करता है,उसे और मृतक के परिवार वालों को डरा धमका कर और लालच देकर अपने पक्ष में शपथपत्र लिखवाये गये और मामले को रफा-दफा कर दिया गया। गीता के अधिवक्ता  ने अदालत के सामने दलील दी कि इस मामले में आरोपियों ने  अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर विवेचना को अपने पक्ष में कर लिया है। विवेचक ने मृतक को मानसिक रोगी दिखााया है अगर यह सच था तब उसे कालेज ने उसे नौकरी पर क्यों रखा। जबकि सच्चाई यह है कि मृतक ने कालेज से ही शिक्षा गृहण करने के बाद ही वहां नौकरी पायी थी। 
           
अदालत ने अधिवक्ता के तर्कों से संतुष्ट होकर आत्महत्या के लिये उकसाने के इस मामले की पुरानी विवेचना  के आधार पर लगाई गई फाइनल रिपोर्ट को रद्द कर दिया है तथा अदालत ने  मामले की विवेचना फिर से  कराने के आदेश थानाध्यक्ष साहिबाबाद एवम् एसएसपी गाजियाबाद को दिए हैं तथा विवेचना  8 अक्टूबर  2018 तक  पूरा करने को कहा है।

      
 अब देखना यह है के दूसरी बार की जांच मैं क्या निष्कर्ष निकलता है। इस बार मामले की विवेचना एसआई गोविंद सिंह को दी गई है। लेकिन पीड़िता गीता उर्फ रूपा ने एसएसपी गाजियाबाद से मिलकर साहिबाबाद थाना पुलिस से लेकर क्राइम ब्रांच गाजियाबाद से जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि पहले विवेचक ने मृतक के हैंडराइटिंग को मिलाने के लिये मांगे दस्तावेज को उसने केश डायरी से गायेब कर दिया है तथा अब उससे नये विेवेचक फिर से दस्तावेज  मांग रहा है। जवकि उसके पास मृतक पति का कोई हस्तलिखित दस्तावेज नहीं बचा है। विेवेचक कालेज मेे जाकर भी उसके पति के हस्ताक्षरों का मिलान कर सकता है तथा कालेज में पढ़ाई के दौरान की उत्तर पुुस्तिाओं को भी मांग कर हस्ताक्षर मिलान करा सकता है। उसे शक है कि सुसाइड नोट को झूंठा दिखाकर फिर से आरोपयिों को बचाने के प्रयास शुरू हो गये हैं। इसलिये वह चाहती है कि यह जांच क्राइम ब्रांच के ईमानदार अधिकारियों द्वारा करायी जाय। लेकिन इस मामले में अभी एसएसपी ने जांच को क्राइम ब्रांच के हवाले करने का कोई आश्वासन उसे उसे नहीं दिया हैं । 
   
गीता उर्फ रूपा को आशंका है कि आरोपी  प्रभावशाली और धनाढ्य लोग हैं। कालेज और थाना आस पास हैं तथा आरोपयिों का थाना साहिबाबाद पुलिस के अधिकारियों पर  अच्छा प्रभाव है इसलिये आरोपीे इस विवेचना को फिर से प्रभावित कर सकते हैं ।






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