मोहन भागवत ने गौरक्षा पर जोर दिया, लेकिन हिंसा को नकारा Mohan Bhagwat insists on Gorkha, but deny violence



नयी दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को गौरक्षा की वकालत की, लेकिन हिंसा को नकारा और कहा कि मुद्दे पर किसी को भी कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए। संघ प्रमुख ने यह भी कहा, ‘‘हमें दोहरे मापदंडों से भी बचना चाहिए। गौ तस्करों की ओर से होने वाली हिंसा पर कोई बात नहीं होती।’’ वह गौरक्षा और भीड़ द्वारा लोगों को पीट-पीटकर मारे जाने से संबंधित सवालों का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि गौरक्षा के नाम पर किसी के भी द्वारा कानून को अपने हाथों में लिया जाना एक अपराध है और ऐसे मामलों में कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सवाल विभिन्न राज्यों में गौरक्षा के नाम पर हिंसा के मद्देनजर उठा। वहीं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि संघ अंग्रेजी सहित किसी भी भाषा का विरोधी नहीं है लेकिन इसे उचित जगह दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह किसी भारतीय भाषा का स्थान नहीं ले सकती।

संघ के तीन दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन लिखित प्रश्नों का जवाब देते हुए भागवत ने कहा, "आपको अंग्रेजी समेत किसी भी भाषा का विरोधी नहीं होना चाहिए और इसे हटाया नहीं जाना चाहिए।" उन्होंने भी कहा, "हमारी अंग्रेजी के साथ कोई शत्रुता नहीं है। हमें कुशल अंग्रेजी वक्ताओं की ज़रूरत है।




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