जस्टिस गोगोई बने देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश Justice Gogoi becomes country's 46th Chief Justice



नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने देश के 46वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में आज शपथ ली।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति में उन्हें सीजेआई पद की शपथ दिलाई। वह न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा का स्थान लेंगे, जो बुधवार को सेवानिवृत्त हुये हैं।
न्यायमूर्ति गोगोई का 13 महीने से थोड़ी अधिक अवधि का कार्यकाल होगा और वह अगले वर्ष 17 नवंबर को सेवानिवृत होंगे।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और एच.डी. देवेगौड़ा, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रेल मंत्री पीयूष गोयल, विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवदर्द्धन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमत कौर बादल, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीश तथा एटर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल मौजूद थे। 
लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद भी समारोह में उपस्थित थे। 
शपथ लेने के बाद न्यायमूर्ति गोगोई ने अपनी माँ शांति गोगोई के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
18 नवंबर, 1954 को जन्मे न्यायमूर्ति गोगोई ने 1978 में वकालत के पेशे की शुरुआत की थी। उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में संवैधानिक, कराधान और कंपनी मामलों में वकालत की।
उन्हें 28 फरवरी, 2001 को गुवाहाटी उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। नौ सितंबर, 2010 को उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में हो गया। उन्हें 12 फरवरी, 2011 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्हें पदोन्नति देकर 23 अप्रैल, 2012 को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश के बाद के वरिष्ठतम न्यायाधीश के नाम की सिफारिश करने की परंपरा के अनुसार पिछले महीने के आरंभ में ही न्यायमूर्ति गोगोई के नाम की सिफारिश अपने उत्तराधिकारी के तौर पर की थी।


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