राम मंदिर पर ऐसा अध्यादेश लायें तो कोई विरोध नहीं करेगा By डॉ. वेदप्रताप वैदिक If there is such ordinance on Ram temple, then there will be no opposition





डॉ. वेदप्रताप वैदिक 
सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर के मामले को जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया है। जनवरी 2019 में वह फैसला दे देगा, ऐसा उसने नहीं कहा है। तीन महीने बाद वह उस बेंच का निर्माण करेगा, जो मंदिर-मस्जिद के मामले पर विचार करेगी। वह कौन-से मामले पर विचार करेगी ? इस मामले पर नहीं कि जिसे राम जन्मभूमि कहा जाता है, उस 2.77 एकड़ जमीन पर मंदिर बनेगा या मस्जिद बनेगी या दोनों बनेंगे ? वह और कितने साल तक विचार करेगा, यह भी वह नहीं बता रहा है।

वह तो 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले पर सिर्फ अपील सुनेगा, जिसके तहत उस पौने तीन एकड़ जमीन को तीन हिस्सों में बांटकर उसने तीन दावेदारों को दे दी थी। ये तीन दावेदार हैं- रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड। इस फैसले का भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ याने तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी और संघ-प्रमुख मोहन भागवत ने स्वागत किया था लेकिन इन दोनों सज्जनों से कोई पूछे कि उस पौने तीन एकड़ में आप मंदिर-मस्जिद साथ-साथ बनने देंगे क्या ? और क्या वे साथ-साथ रह पाएंगी ? खासतौर से मस्जिद के ढांचे को ढहाने के बाद ? 

इसी समस्या को हल करने के लिए मेरा सुझाव यह था कि पौने तीन एकड़ नहीं, बल्कि लगभग 100 एकड़ जमीन में सरकार सर्वधर्म पूजा-स्थल बनाए और राम की अयोध्या को विश्व की अयोध्या बना दे। उसे विश्व-तीर्थ बना दे। जनवरी 1993 में प्रधानमंत्री नरसिंहरावजी एक अध्यादेश लाए और सरकार ने 70 एकड़ जमीन ले ली। बाद में संसद ने उसे कानून का रूप दे दिया। अक्तूबर 1994 में पांच जजों की संविधान पीठ ने जो फैसला दिया, उसमें इस 70 एकड़ में राम मंदिर, मस्जिद, पुस्तकालय, संग्रहालय, धर्मशाला आदि बनाने का निर्देश दिया। मैं कहता हूं कि वहां सिर्फ राम मंदिर और मस्जिद ही क्यों बने ? दुनिया के लगभग सभी प्रमुख धर्मों के तीर्थ क्यों न बनें ? यह विश्व-सभ्यता को भारत की अभूतपूर्व देन होगी। अयोध्या विश्व पर्यटन का आध्यात्मिक केंद्र बन जाएगी। यदि इसी पद्धति का अध्यादेश भाजपा सरकार लाएगी तो वह सबको पसंद आ जाएगा और सर्वोच्च न्यायालय की दुविधा भी समाप्त हो जाएगी। यदि सरकार अपनी बला अदालत के सिर टालना चाहती है तो उस पर छल-कपट, कायरता और अकर्मण्यता के आरोप लगेंगे और वह अपने आप को वचनभंगी सिद्ध करेगी।



 डॉ. वेदप्रताप वैदिक


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