खुल्लम - खुला : बड़े मायूस होकर तेरे कूचे से हम निकले By संजय त्रिपाठी



खुल्लम - खुला

2019 का शरूर सभी राजनीतिक पार्टियों पर सर चढ़ कर नाच रहा है। कोई भी मुद्दा हो पार्टियों उसे लपक एक - दूसरे पर आरोप - प्रत्यारोप शुरू कर दे रहे है। अब छोटी - छोटी मुद्दे भी हनुमान के पुंछ के तरह लंबे होते जा रहे है। सब सफाई में लगे हैं, जिसके नाम ज्यादा उछल रहा है वे विपक्षी पार्टियों का हवाला देकर अपनी गिरवान बचाने मे लग जाता है। गुजरात में लूंगी पहनने पर बिहारी व उत्तर प्रदेश के लोगों की ठूकाई हो रही है। कोई जिग्नेश को इसका सूत्रधार बता रहा है तो कोई भाजपा को वोट की राजनीति का पैतरा बता रहा है। उधर एम जे अकबर की आखिर लुटिया डूब ही गई। पहले तो शुरू में विदेश से आने पर ऐसा लगा कि वे इस लड़ाई को आर - पार लड़ने के मूड में है। लेकिन दो दिन बाद ही आर - पार की सारी लड़ाई टांय - टांय फिस्स हो गई । इस कदर दबाव बढ़ा की उन्हें बडे बेआबरू होकर मंत्रिमंडन से निकलना पड़ा। लेकिन ऐसे सख्स जिस पर एक नहीं, बल्कि 19 महिलाओं ने आरोप लगाया। हो सकता है आरोप की फेहरिस्त और भी लंबी हो क्योंकि कुछ महिलाएं तो आज भी पुरानी संस्कृति में ही जी रही है। उन्हें ‘ मी टू ’ के माध्यम से स्वर ऊंचा करना अभी भी पसंद नहीं है। अभी कई मामले राष्ट्रीय क्षितिज पर छाये ही थे, तब तक रावण ट्रेन ने 5 दर्जन से ऊपर लोगों को लील गया। दशहरा की खुशी अमृतसर में मातम में बदल गई। आयोजक के साथ लोग गुरू सिद्धू पर कीचड़ उछालने लगे है। लोग तो कम पंजाब के विरोधी ज्यादा ही पूं पा कर रहे है। आयोजक गुरू की बीबी के लिए भीड़ जुटाने में लगे थे। भीड़ जुट भी गई और जैसे ही मैडम अपनी भाषण खत्म कर चलने को हुई वैसे ही रावण ट्रेन दैत्य के रूप में आकर 60 से ज्यादा लोगों को निगल गया। रेलवे का कहना है कि हमारा इसमें कोई दोष नहीं है। जो भी दोष है वह पंजाब सरकार की है। जब मेरा दोष नही ंतो मेरे तरफ से मुआवजा कैसा ? देश में रोज कोई न कोई मामला मुंह बाये खड़ा है। सरकार के भी नाक में दम है। मोदी सरकार देश के समृद्धि और विकास के लिए जो भी अच्छा कर रही है, उसमें नोटबंदी, जीएसटी, राफेल, महंगाई और पेट्रौल - डीजल  पलीता लगाने को तैयार है। कभी मंदिर - मस्जिद का मुद्दा छाये रहता है तो कभी तीन तलाक का। अब तो बीजेपी के लिए ‘मी टू’ आफत बन कर आया है। अकबर नाम से पहले तो मुगल शासक की छवि निखर कर आई। बाद में पता चला की ये बीजेपी सरकार के मंत्री है जो अपनी पत्रकारिता के समय में कृष्ण के तरह रासलीला रचाने में लगे थे। पहले राजीव गांधी के खासमखास रहे, बाद में अपनी जुगाड़ बना बीजेपी में गोट फिट कर मंत्री भी बन गये। अब तो ‘ ताड़ से गिरे खजूर पर अटके ’  जैसी स्थिति में झूल रहे है। समय का चक्र भी कैसा है कभी तो वह आकाश पर बिठाता है कभी धूल में मिला देता है। खैर, स्थितियां जो भी हो क्या कोई नटवर नागर के खिलाफ भी ‘मी टू’ के तहत कैंपेन चला सकेगा। आज ऐसे भी लोगों की जरूरत है जो आगे आकर इसका भी पर्दाफांस करे।   

संजय त्रिपाठी    



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