खुल्लम - खुला : पिंजरे के पालतू तोता की टांय - टांय Pet parrot stages of cage - Tie




                                                                       खुल्लम - खुला


‘ सबहीं नचावत राम गोसाईं ’ सुना तो था आज देख भी रहा हूं। देश की प्रतिष्ठा को चार चांद लग रहे हैं। यहां देश की सर्वोच्च संस्था हो या बृजेश पाठक की संस्था सारे सुर्खियां बटोरने में लगे है। पिछले एक सप्ताह से देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई इस समय लाइव टेलीकाॅस्ट दिखा रहा है। इच्छानुसार प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय भी इसका भागीदार बन जा रहे है। जनता इस उघेड़ बुन में पड़ी है कि जो सबकी जांच कर रहे हैं अब उनकी जांच कौन करेगा? उपर से - नीचे से लेने में इस संस्था वाले भी किसी से पीछे नहीं है। साख बचाने के लिए तथा लाइव टेलीकाॅस्ट में खुद को दिखाने के लिए पीएम भी मैदान में कूद पड़े। इसे देख विपक्षी भी बौखला गये। पीएमओ का तर्क हैं कि इस नामी एजेंसी की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए आपस में लड़ रहे दोनों साढ़ों को अलग करने के लिए पीएम को दखल देना पड़ा। दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि राफेल डिल की जांच की दिशा भटकाने के लिए पीएम ने दखल दिया। अब दो न जवाब, दोनों साड़ों की लड़ाई में झुंड का सत्यानाश तो होना ही था। लड़ाई भी लूट - खसोट की हैं। बाॅस कह रहा है कि हमारा मातहत करोड़ों की हेराफेरी किया है तो मातहत अपनी बचाव में कहे या सच्चाई वह भी आरोप लगा रहा है कि बाॅस ने भी उसी से उतना का ही हेराफेरी किया है जितने का मुझपर आरोप लगा रहा है। सच कौन है और झूठ कौन है इसका निर्णय अब सीबीसी करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कभी सीबीआई को ‘ पिंजरे का तोता ’ कहा था, अब पूरी तरह आम जनता को भी स्पष्ट हो गया है कि इसका इस्तेमाल सिर्फ राम - राम बुलाने में ही किया जाता है। पहले भी विपक्ष के नेता इसे पीएम का हथियार बताते रहे हैं, लेकिन हम लोग व आम आदमी भी इस पर विश्वास नहीं करता था। उस समय ऐसा लगता था कि अपनी गर्दन बचाने के लिए विपक्षी नेता इस तरह का आरोप लगा रहे हंै, लेकिन अब महसूस हो रहा है कि विपक्षी नेताओं के चिघाड़ में कुछ तो सच्चाई है। आज पिंजरे का तोता दो खेमों में बंट गये है। इस तर्क से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि यह राफेल को लेकर ही हंगामा तो नहीं मचा है। याद होगा कि प्रशांत भूषण ने सीबीआई के बाॅस से मिलकर राफेल डिल पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की मांग की थी। इघर बाॅस ने जब अपने मातहत स्पेशल डाॅयरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच व रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया तो टाॅप आर्डर पर भी पूरी तरह पलिता लग गया। मातहत पहले से ही जरखरीद गुलाम का प्रदर्शन करता रहा है, अब इस खीचड़ी ने साख का प्रश्न पैदा कर दिया। अतंतः दोनों को आधी काली रात में छुट्टी पर भेजने का फरमान सुनाया गया और दूसरे नागेश्वर राय को डायरेक्टर नियुक्त कर रात में ही चार्ज संभालने का आदेश दिया गया। इस सरकार मंें रात का महत्व कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। जो भी घोषणा की जा रही है उसमें रात का खास ध्यान रखा जा रहा है। आखिर पिंजरे का तोता की साख कैसे बचे इस पर सरकार को ही ध्यान देना है। उधर बाॅस आलोक वर्मा ने जब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तब सरकार भी नरम पड़ती नजर आई। अंत में सरकार को बताना पड़ा कि अभी वर्मा ही बाॅस हैं, सिर्फ उन्हें छुट्टी पर ही भेजा गया है। लेकिन इसके पहले उनका भी जासूसी करने का मामला दिन भर गंुजता रहा। चार आईबी के अधिकारी उनके घर के बाहर से पकड़े भी गए। मामला गृह मंत्रालय तक गया अंत मे उनहें छोड़ दिया गया। आखिर ‘ पिंजरे का तोता ’ तो ऐसे मामले पर टांय - टांय करेगा ही। कम से कम हम लोग तो चुप रहे। 
संजय त्रिपाठी  



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