रालोसपा और भाजपा में सीटों को लेकर नहीं बनी सहमति RLSP and BJP have not agreed on the seats



नयी दिल्ली । राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की घटक राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए ‘सम्मानजनक सीटों’ की मांग करते हुए कहा है कि आज कुर्बानी देने की बात की जा रही है तो राज्य में जनता दल यू के साथ आने पर बनी सरकार में उनकी पार्टी को भागीदार क्यों नहीं बनाया गया।
बिहार में लोकसभा सीटों के बंटवारे पर भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मंगलवार को हुयी बातचीत के बाद श्री कुशवाहा ने कहा कि अभी कोई फैसला नहीं हुआ है और बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के लाेग और समर्थक चाहते हैं कि रालोसपा को ‘सम्मानजनक ’ सीटें मिले , हालांकि उन्होंने स्पष्ट संख्या बताने से इंकार कर दिया। उन्होंनें कहा कि जरुरत पड़ी तो सीटों को लेकर वह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात करेंगे। पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 40 में से तीन सीटें मिली थीं और उसने तीनों सीटें जीती थीं।
श्री कुशवाहा ने संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देने के साथ ही मध्यप्रदेश में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की और 66 उम्मीदवारों की सूची जारी की। उनके इस कदम को भाजपा पर दवाब बनाने के रुप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह अभी भी राजग में हैं और चाहते हैं कि अगले लोकसभा चुनाव के बाद श्री मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनें और उनकी पार्टी इसके लिये काम भी कर रही है।
रालोसपा प्रमुख ने बताया कि उन्होंने श्री यादव से मुलाकात कर 2019 के लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत की और उन्हें इस संबंध में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना से अवगत कराया है। राज्य में यदि लोगों के भावना के अनुरूप सीटों का बंटवारा होता है तो राजग और मजबूत होगा। उनका कहना था कि सीटों की संख्या भाजपा काे बता दी गयी है लेकिन उसके बारे में मीडिया में चर्चा नहीं की जा सकती। बातचीत पूरी हो जाने के बाद इस संबंध में घोषणा की जायेगी। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में राजग की घटक लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान से भी बातचीत करेंगे।
भाजपा अध्यक्ष के इस बयान पर कि गठबंधन में नये सहयोगी (जद यू) के आने पर सभी सहयोगी दलों की सोटेें कम होंगी , उन्होंने कहा कि हम कुर्बानी देने को तैयार लेकिन हमें यह बताया जाये कि जब नये सहयोगी के आने से राज्य में सत्ता आयी थी तो उसका लाभ उनकी पार्टी को क्यों नहीं मिला। भागीदार होने का मतलब यही है कि लाभ और हानि दोनों में साझेदारी हो।
उल्लेखनीय है कि श्री शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गत शुक्रवार को बातचीत के बाद घोषणा की थी कि भाजपा और जद यू लोकसभा की बराबर सीटों पर चुनाव लडेंगे तथा अन्य घटक दलों से बातचीत करने के बाद दो तीन दिन में यह स्पष्ट कर दिया जायेगा कि कौन पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।


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