पत्रकार साथी की मौत पर 50 लाख की मांग Demand of 50 million on the death of a journalist



पीडब्ल्यूए के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की दंतेवाड़ा और नोएडा की घटना की कड़ी निन्दा
चैथे स्तंभ की रक्षा के लिए मीडियाकर्मियों ने दिखाई एकजुटता

गाजियाबाद, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )  पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.) ने शुक्रवार को एक शोक सभा का आयोजन कर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में जान गंवाने वाले दूरदर्शन के कैमरामैन (फोटो पत्रकार) अच्युतानंद साहू को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों समेत कई अन्य मीडियाकर्मी भी मौजूद रहे। राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने इस दौरान सरकार की ओर से साहू के परिजनों के लिए की गई 15 लाख रुपये की सहायता राशि को कम बताते हुए 50 लाख रुपये देने की मांग की है।
शुक्रवार, 02 नवंबर को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत पत्रकार साथी की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए इस घटना की कड़ी से कड़ी निंदा की। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन की सरकार की ओर से साहू के परिजनों के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग को भी जायज ठहराया है। साथ ही साहू की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। महासचिव सुधांशु श्रीवास्तव का कहना था कि मामले की तेजी से जांच की जाए और जो भी इस घटना के पीछे दोषी पाया जाएं, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
श्रद्धांजलि सभा में श्री बच्चन ने कहा है कि इन मांगों को लेकर जल्द ही एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ से मुलाकात करेगा। उन्होंने कहा कि आए दिन मीडियाकर्मियों पर हमले हो रहे हैं। गुरुवार को नोएडा में भी इंडिया न्यूज के रिपोर्टर ललित मोहन पर कुछ बदमाशों ने हमला किया है। इसके बावजूद सरकार पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। न ही सरकार की ओर से पीडित पत्रकारों के परिजनों को किसी तरह की आर्थिक सहायता दी जाती है। यही नहीं, कई मामलों में तो मीडिया संस्थान पीडित पत्रकारों को अपना कर्माचारी मानने से ही इनकार कर देते हैं, यह स्थिति बदलनी चाहिए।
पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने पत्रकार संगठनों को लेकर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब भी इस तरह की कोई घटना होती है तो कुछ दिन तक तो मुहिम चलती है। उसके बाद ज्यादा सक्रियता दिखाई नहीं देती। याद रखिए, जिन लोगों ने पत्रकारों पर हमला किया है, उन लोगों से हमारी हमदर्दी किसी भी तरह से नहीं होनी चाहिए। वे लोग लोकतंत्र के दुश्मन हैं। उन्हें लोकतंत्र के इस चैथे स्तंभ और इसके कानून में विश्वास नहीं है। हमें अपनी आजादी की सुरक्षा रखनी है तो उनको भी बेनकाब करना होगा, जो खाकी और खादी वर्दी में अपराधियों का साथ दे रहे हैं।



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