इतिहास कैसे अपने आप को दोहराता है, चैटाला परिवार इसका बड़ा उदाहरण है By नीरज कुमार दुबे How history repeats itself, the Chattala family is a big example




नीरज कुमार दुबे
कहते हैं कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण इंडियन नेशनल लोकदल में देखने को मिल रहा है। ओम प्रकाश चैटाला के नेतृत्व वाली पार्टी में जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। चैटाला ने बड़े बेटे अजय चैटाला और उनके दोनों बेटों दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है और छोटे बेटे अभय चैटाला पर पूरा विश्वास जताते हुए पार्टी की कमान एक तरह से उनके हाथों में सौंप दी है।

एक घर में दो पार्टी

पिता ओम प्रकाश चैटाला के साथ शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल जेल की सजा काट रहे अजय चैटाला ने इस झटके के बाद नयी पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है और कहा है कि उनकी नयी पार्टी अगले साल प्रदेश में विधानसभा और राज्य की सभी दस सीटों पर लोकसभा का चुनाव लड़ेगी। अजय चैटाला अगले महीने नयी पार्टी का गठन करेंगे। इनेलो में यह विभाजन अजय चैटाला और उनके छोटे भाई अभय चैटाला के बीच वर्चस्व के टकराव के कारण हुआ है। अजय का कहना है कि नई पार्टी में ष्जन नायकष् शब्द होगा जो उनके दादा और पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल का परिचायक होगा। अजय चैटाला की नयी पार्टी नौ दिसंबर को जींद में एक रैली का आयोजन करेगी। पिछले सप्ताह अजय चैटाला ने कहा था कि ‘‘मैं अपने छोटे भाई को एक उपहार के रूप में इनेलो और पार्टी का चुनाव चिह्न चश्मा दे रहा हूं।’’ माना जा रहा है कि अजय चैटाला के नेतृत्व वाली नयी पार्टी राज्य में आम आदमी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन भी कर सकती है।

विवाद के कारण क्या हो सकते हैं ?

अजय चैटाला के बेटे दुष्यंत चैटाला जोकि इस समय लोकसभा के सदस्य हैं वह हरियाणा में अपनी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनना चाहते थे लेकिन चाचा अभय चैटाला जोकि लंबे समय से हरियाणा विधानसभा के सदस्य हैं और फिलहाल विपक्ष के नेता हैं, उन्हें यह मंजूर नहीं था। जब अभय अपने भतीजे की इस महत्वाकांक्षा की राह में आये तभी से चाचा और भतीजे के बीच जंग शुरू हो गयी और आखिरकार परिवार का विभाजन करा गयी। इस पारिवारिक जंग में दोनों ओर से जिस तरह कड़े शब्दों का उपयोग किया जा रहा था वह दर्शा रहा था कि लंबे समय से जो तीखे शब्द सीने के भीतर दबे पड़े थे वह एकाएक बाहर आ रहे हैं।

आग तो पहले से ही सुलग रही थी

ओम प्रकाश चैटाला को किन वास्तविक परिस्थितियों में बड़े बेटे को पार्टी से निकालने का निर्णय लेना पड़ा यह तो वही जानते होंगे लेकिन इतना तो दिख ही रहा है कि उन्होंने जो बोया है वही काट रहे हैं। जब चैटाला राज्य के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तब भी वह बड़े बेटे अजय को केंद्रीय राजनीति और छोटे बेटे अभय को हरियाणा राज्य की राजनीति में बनाये रखते थे। 2013 में जब उन्हें शिक्षक भर्ती घोटाले में बड़े बेटे के साथ 10 साल के लिए जेल जाना पड़ा तो अभय चैटाला ने ही पार्टी को चलाया और पिता तथा भाई का केस भी लड़ा। 2014 के लोकसभा चुनावों में अजय के बेटे दुष्यंत लोकसभा चुनाव लड़े और मोदी लहर के बावजूद अपनी सीट निकालने में कामयाब रहे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप विश्नोई को हराया। दुष्यंत बाद में विधानसभा चुनाव भी लड़े लेकिन हार गये। इसके पीछे उनका आरोप था कि उन्हें जानबूझकर हरवाया गया है। इशारों ही इशारों में उनका आरोप चाचा अभय चैटाला पर ही था। दुष्यंत की माँ और अजय चैटाला की पत्नी नैना हालांकि डबवाली से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुँचने में सफल रही थीं।

बेटों का कॅरियर सँवारने की मची थी होड़

ओम प्रकाश चैटाला के दो बेटों अजय और अभय के भी दो-दो बेटे हैं और बेटों को राजनीति में स्थापित करने की होड़ भी इस पारिवारिक विवाद का कारण मानी जा रही है। अजय चैटाला के बड़े बेटे दुष्यंत चैटाला सांसद हैं तो छोटे बेटे दिग्विजय पार्टी की छात्र इकाई इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वहीं अभय चैटाला के बड़े बेटे करन सिरसा जिला परिषद के वाइस चेयरमैन हैं और छोटे बेटे अर्जुन अभी राजनीति में अपने लिये मुकाम तलाश रहे हैं।

इतिहास ने कैसे अपने को दोहराया

वर्ष 1989 में जब देवी लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे तब उनके छोटे बेटे रंजीत सिंह उनकी कैबिनेट में कृषि मंत्री हुआ करते थे। रंजीत सिंह को पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं का समर्थन हासिल था और देवी लाल के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें ही देखा जाता था। देवी लाल के बड़े बेटे ओम प्रकाश चैटाला तब पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल के अध्यक्ष हुआ करते थे। जब देवी लाल देश के उप-प्रधानमंत्री बनाये गये तो उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर अपनी जगह बड़े बेटे ओम प्रकाश चैटाला को कमान सौंप दी। इस निर्णय से सभी को हैरानी हुई। खुद देवी लाल के छोटे बेटे रंजीत को यह फैसला पचा नहीं और उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। पिता देवी लाल ने रंजीत को राज्यसभा भेजा लेकिन वह पार्टी में ज्यादा समय तक नहीं रहे। रंजीत सिंह ने बाद में कांग्रेस से नाता जोड़ लिया और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी लोगों में शामिल हो गये।

मौजूदा विवाद इतना कैसे बढ़ गया ?

अभी जो मामला गर्माया उसकी शुरुआत इसी वर्ष अक्तूबर से हुई। यह सही है कि चैटाला के दोनों बेटों अजय और अभय के बीच विवाद बहुत पहले से था लेकिन दोनों सार्वजनिक रूप से इसे हमेशा नकारते रहे थे। लेकिन 03 अक्तूबर को पार्टी की रैली में ओम प्रकाश चैटाला ने दुष्यंत चैटाला के समर्थकों को सार्वजनिक रूप से लताड़ लगाई क्योंकि वह पार्टी में युवा नेतृत्व की मांग कर रहे थे। इसके बाद 07 अक्तूबर को गोहाना में हुई रैली में जब अभय चैटाला बोलने के लिए खड़े हुए और दुष्यंत समर्थकों ने शोर मचाकर उन्हें बोलने नहीं दिया तो मंच पर मौजूद ओम प्रकाश चैटाला की नाराजगी का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और उन्होंने पार्टी की युवा और छात्र इकाई को भंग कर दिया जिसका नेतृत्व क्रमशः दुष्यंत और दिग्विजय कर रहे थे। बाद में चैटाला ने दोनों पोतों और अपने बड़े बेटे अजय को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

बहरहाल, चैटाला परिवार में हुए इस बिखराव का फायदा राज्य में भाजपा और कांग्रेस को मिलना तय है। राज्य में 2019 के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ बढ़ती नाराजगी का फायदा शायद ही विपक्ष को मिल पाये क्योंकि चैटाला परिवार की दो पार्टियों के बीच वोट बंट जाने से सत्ताधारी दल को ही फायदा होगा। कांग्रेस का राज्य में नेतृत्व अभी तक स्पष्ट नहीं है और मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी भी हरियाणा की सभी लोकसभा और विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है।

नीरज कुमार दुबे



Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment