मनुष्य के पापों का फल उसके सामने आता है The consequence of man's sins comes in front of him



गोपालगंज, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )  सवनहा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास पंडित योगेन्द्र तिवारी ने पाप व पुण्य का फल सुनाते हुए कहा कि मनुष्य को अपने पापों का फल भोगना ही पड़ता है। इन पापों से मुक्ति के लिए भगवत भजन ही एक मात्र सहारा है। 

श्री तिवारी ने  कल सृष्टि की उत्पति एवं भगवान के बारहा अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि इंसान का पाप उसके सामने आता है। यही कारण है कि जिसकी मृत्यु मंगलमय होता है, उसका जन्म और जीवन सफल होता है। उन्होंने कहा कि राजा परिक्षित सम्राट हाने के बाद भी अपनी गलती से अपनी मृत्यु को मंगलमय नहीं बना पाये। उनकी मृत्यु ऋषि के श्राप के कारण सर्प के काटने से हुआ जो उनको यह अहसास कराता है कि जीवन बहुत सफल होने के बाद भी उनकी मृत्यु अमंगल हो गई । बेद ब्यास जी भागवत के माध्यम से हम सभी को यही उपदेश देते हैं कि जीवन सफल बनाने के वजाय अपनी मृत्यु को सफल बनाये। जिसकी मृत्यु मंगल व अच्छी होती है उसका जन्म और जीवन भी मंगलमय होता हैं । 

उन्होंने यह भी कहा कि जो बड़ा होता है वह हमेशा नीचा झूका रहता है। बडप्पन झुका होने का पहला संकेत है। मनुष्य को लोभ, लालच, मोह, माया ओर तृष्णा चारो तरफ से घेर रखा है। इसी कारण वह प्रभु के भजन से दूर भागता है। आज के समय में लोग भगवान से शीर्फ पाने की इच्छा से ही मंदिर व देवालय जाते है। जब तक मनुष्य प्रभु से अपनी तारतम्य को नहीं जोड़ पाता तब तक उसका उद्धार नहीं हो सकता और उसकी मृत्यु मंगलमय नहीं हो सकती । 



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