मेट्रो किराया दोगुना होने से 8 करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने मेट्रो छोड़ी More than 80 million passengers left the metro due to double cost of metro fare



  • निजी वाहनों के बढ़ने से पहले से ही प्रदूषित दिल्ली में और भी ज्यादा बढ़ा प्रदूषण
  • डी.एम.सी.ए ने किराया बढ़ोत्तरी की भर्त्सना की
  • मेट्रो को जन-सुविधा के तौर पर वापस लेने के लिए संघर्ष तेज करेगा डी.एम.सी.ए

नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन द्वारा जारी हालिया वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली मेट्रो में 2017-18 के दौरान 8 करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी के कारण मेट्रो यात्रा को छोड़ दिया। ज्ञात हो कि पिछले साल अक्टूबर में डी.एम.आर.सी द्वारा मेट्रो किराए को दोगुना बढ़ोत्तरी की गयी थी। इस फैसले के खिलाफ दिल्ली मेट्रो कम्युटर्स एसोसिएशन (डी.एम.सी.ए) ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था, क्योंकि इस फैसले के कारण बड़ी संख्या में मध्यम-वर्ग और आर्थिक तौर पिछड़े तबकों के लोगों को मेट्रो में सफर छोड़ना पड़ा था।  

किराया बढ़ोत्तरी का फैसला उस वक्त लिया गया था, जब दिल्ली की आबादी पहले से ही महंगाई की मार झेल रही थी। ज्ञात हो कि किराये में बढ़ोत्तरी के कारण महिलाओं को भीड़-भरी बसों में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ा है, जिससे शोषण के मामलों में भी बढ़ोत्तरी हुई है। साथ ही, मजदूरों और छात्रों के लिए भी बढ़े किराए से परेशानी हुई, क्योंकि पहले से ही मेट्रो का किराया काफी ज्यादा था। इस बढ़ोत्तरी से दिल्ली में प्रदूषण की समस्या भी बढ़ी है क्योंकि इससे निजी वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ जिससे प्रदूषण भी बढ़ा है, जबकि समय की जरुरत है कि दिल्ली को प्रदूषण-मुक्त बनाया जाए।

ज्ञात हो कि किराया बढ़ोत्तरी के फैसले के पीछे दिल्ली मेट्रो को हो रहे नुक्सान को रोकने की जरूरत को बताया गया था। यह पूर्णतः गलत है क्योंकि सरकार व्यापारी घरानों को तो लाखों करोड़ का टैक्स माफी दे रही है, परन्तु किराया बढ़ाने के लिए नुक्सान का कारण बताया गया था। किराया बढ़ोत्तरी के पीछे मुख्य कारण जापानी कम्पनी से लिया गया लोन चुकाना था, जिसके लिए जनता को किराया बढ़ाकर लूटा जा रहा है। साथ ही, दिल्ली मेट्रो अपने कर्मचारियों को ठेके पर नियुक्त करता है और उनको न्यूनतम मजदूरी भी न देकर, और भी अधिक मुनाफा कमाता है। डी.एम.सी.ए मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी की भर्त्सना करता है और मेट्रो को जन-सुविधा के तौर पर वापस लेने के लिए अपनी कोशिशें तेज करेगा।



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