संपादकीय : दिशाहीन होता समाज Editorial: A society that is directionless



आज समाज में ऐसा लग रहा है कि हर व्यक्ति उग्र हो गया है। मानवता और सहनशीलता समाप्त होती जा रही है, नतीजा रोडरेज, पार्किंग जैसे मामले को लेकर आये दिन होने वाली विवाद है। कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आ रही है, जो पूरी तरह दिल को झकझोर देती है। सिर्फ पुलिस , सरकार व प्रशासन पर हर जिम्मेदारी को थोप कर हम अपने जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते। आज की युवा पीढी हमेशा उत्तेजीत ही दिख रही है। बीना सोचे समझे किसी की हत्या तक कर देने में इन्हें कोई गुरेज नहीं है। आखिर इसका कारण क्या है। हम किस दिशा में जा रहे है? हमारी युवा पीढ़ी किस दिशा की ओर बढ़ रही है? अगर आज के भटकते युवा पीढ़ी को लेकर समाज और सरकार शीघ्र पहल कर कोई ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचती है तो वह दिन दूर नहीं जब एक मानव दूसरे मानव के खून का प्यासा हो जायेगा। लगातार तीन दिन कुछ ऐसी खबरें सामने आई जो समाज की दिशाहीनता पर पहल के लिए मुझे बार - बार उकसा रही है। एक घटना दिल्ली के शालीमारबाग की है। 29 नवंबर को दिनदहाड़े शालीमारबाग में सरेआम दो हत्याओं से दिल्ली दहल गया। भीड़ देखती रही, हमलवारों ने युवकों को चाकुओं से गोद - गोद कर मार डाला। हमलवार युवकों की संख्या करीब दो दर्जन थी। रोडरेज से हुआ विवाद दो लोगों की हत्या पर जाकर खत्म हुआ। 20 मीनट तक चले इस खुनी खेल से आसपास के लोग कांप उठे। बीच बचाव के लिए आगे आया युवक भी मारा गया। क्या एक सभ्य समाज इसे सिर्फ देखता ही रहेगा? जरा सोचिए ! करीब दो दर्जन हमलावरों की भीड़ एक 23 साल के युवक को सरेआम दौड़ा - दौड़ाकर चाकुओं से गोद रही है, ‘ बचा लो, बचा लो, की आवाज लगाता युवक बचने के लिए टूर एंड ट्रैवल के एक आॅफिस में घुस जाता है। वहां भी हमलावर पहुंच जाते हैं, वहां टिकट बुक करा रहा एक अन्य शख्स युवक को बचाने की कोशिश करता है तो हमलावर उसे भी चाकुओं से गोद कर मार डालते है। यह फिल्मी सीन नहीं हकीकत है। क्या ऐसी घटनाएं आपको झकझोरती नहीं ? दूसरी घटना दिल्ली के ही उत्तमनगर की है। यह घटना 27 नवंबर की है। आॅटो चलाते थे अविनाश, गलतफहमी में भीड़ ने चोर समझकर ली थी जान। अविनाश चोर नहीं था। वह आॅटो चला कर अपने सपने पूरा करना चाहता था। बच्चों को अच्छी परवरिश देने के लिए ही उसने पीछले महीने आॅटो खरीदा था। इस क्षेत्र में वह दो लोगों को आॅटो में बैठाकर ले जा रहा था। उनके परा बैट्री थी। लोगों ने बैट्री चोर समझ तीनों को मारापीटा । पांच घेटे तक अविनाश को बिजली के खंम्भे में बांध कर लोगों ने मारा। उसके मां - पिता जी के कहने पर भी लोग उसे नहीं छोड़े । पुलिस को पांच घंटे में भी सूचना नहीं मिली। घयलावस्था में अविनाश को सुबह पुलिस अस्पताल ले गई, जहां उसने दम तोड़ दिया। तीसरी इसी तरह की हृदयविदारक घटना उत्तर प्रदेश के शामली की है। यह घटना 28 नवंबर की है। यहां भीड़ ने पुलिस की गाड़ी से युवक को खींचा, और पीट - पीट कर मार डाला। यह मामला शामली के थाना झिझाना क्षेत्र के हथछोवा गांव का हैं। गांव के राजेन्द्र कश्यप का शराब के नशे में कुछ युवकों से विवाद हो गया। विवाद के बाद डायल 100 की पुलिस पहुंची और राजेन्द्र को पुलिस की गाड़ी में लेकर जाने लगी। कुछ लोग पुलिस द्वारा उसे ले जाने के पक्ष में नहीं थे। भीड़ ने पुलिस के सामने राजेन्द्र को गाड़ी से खींच कर उसे तब तक मारते - पीटते रहे जब तक वह दम न तोड़ दिया। क्या यही है मानवीय व करूणामय समाज ? सोचे - समझे और पहल करें नही ंतो हमारी अगली पीढ़ी का भविष्य व जीवन दोनों खतरे में दिख रहा। 

संजय त्रिपाठी 




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