खुल्लम - खुला : आंख मारे - ये लड़का आंख मारे .......... ! Eyes - This boy kills the eyes ..........!



                                                                   खुल्लम - खुला

कभी यह गाना गाकर और सुन कर प्रसन्न होते थे। आज ‘आंख मारना’ संसद में देख कर प्रसन्न होते हैं। सोनिया का यह छोरा बिगड़ गया है। सोनिया जी .... !  अब तो 49 वर्ष पर भी इस पर ध्यान दो। कही ऐसा न हो छोरा हाथ से निकल जाए। आखिर लोग क्या कहेंगे ? कुछ तो ऐसा है जो इस छोरे को आंख मारने के लिए विवश कर रहा है या पूरानी कोई आदत है जो छुट नहीं रही है। एक बार हो तो कोई बात भी हो। यह तो आये दिन अब देखने - सुनने को मिल रहा है। मोदी जी आप ही कुछ पहल करें। आखिर छोरा कैसे बताये कि उसके तरफ किसी का ध्यान ही नहीं है। चाहे उसके पार्टी वाले हो, या उसके विरोधी यानी बीजेपी वाले। सब 2019 की चुनाव में लगे हुए है। समय निकलता जा रहा है। किसी का उसके निकल रहे समय के तरफ ध्यान नही है। इसी तरह 49 वसंत बीत गये। अब तक कुछ नही ंतो लालू जी के पंक्ति में तो जरूर खड़ा हो गया होता। कुछ नही ंतो एक - दो ही सही आगे - पीछे तो डोल रहे होते। उसके चचेरे भाई को ही देख लो बाप तो बन गया। यहां तो लगता है बीजेपी वाले एक ही परिवार का नाम कोस - कोस कर नाम लेने वाला भी न छोड़ेगे। दास साल बाद इस परिवार का नाम लेने वाला कौन होगा? कम से कम इसारा तो समझो। सबसे ज्यादा जिम्मेदारी मां की होती है। बेटे की शादी, घर - गृहस्ती बसाने, पोते खेलाने की सबसे ज्यादा चिंता मां को ही होती है। मां ही बार - बार कह कर, डाट कर ऊंच - नीच का भेद दिखाकर बेटे को सही रास्ते पर चलने की सलाह देती है। लड़का हाथ से न निकल जाये इसके लिए साथी - संबंधी, रिश्तेदार सब से उसकी शादी की बात चलाने को कहती है। समय से घर बस जायेगा तो इधर - उधर मूंह मारने से बेटा बच जायेगा। प्रतिष्ठा खराब नहीं होगी। किसी को छेड़ने, आख मारने से बचा रहेगा। लेकिन यहां तो मां को भी सिर्फ बेटे को प्रधानमंत्री बनाने की ही धुन लगी हुई है। भला ऐसी कोई मां होती ? अरे, पोता हो जायेगा तो बेटा न सही पोता तो प्रधानमंत्री बन जायेगा। यहां तो सब कुछ हाथ से ही निकलता दिख रहा है। बेटा अब आंख मारने पर उतारू हो गया, पोते की कोई उम्मीद ही नहीं दिख रही । लगता है 2019 भी हाथ से ही निकल जायेगा। अगर अमिताभ जी आज भी परिवार से जुड़े होते तो उन्हें काकी के तरह शादी की बात चलाने की तर्जूबा है। कम से कम अब तो शाह और मोदी को ही समझना होगा। मां को भी समझाना होगा। अरे - ! आज 70 साल एक ही परिवार के शासन करने, देश को लूटने जैसे आरोप तभी तो लगा रहे हो जब जवाहर लाल नेहरू के खनदान का वारिस है जब आगे कोई होगा ही नही ंतब आगे तुम्हारे पार्टी वाले क्या कहेंगे? कम से कम आगे कहने के लिए तो इस लड़के के घर बसाने पर कुछ तो विचार करो। ऐसा न हो अभी सांसद में ही आंख मार रहा है आगे सड़क पर आंख मारने लगेगा तब क्या करोंगे। कोई तो पक्ष - विपक्ष आगे आये, बिगड़ते लड़के का परिवार बसाये। मुझे तो बहुत दुख है। क्या आप दुखी नहीं हैं?    


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