बेरोजगारी के आंकड़े को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है: आयोग Unemployment figures have not been finalized yet: Commission



नयी दिल्ली ।  बेरोजगारी को लेकर राष्ट्रीय सैम्पल सर्वे कार्यालय (एनएसएसओ) की लीक रिपोर्ट पर नीति आयोग ने आज कहा कि अब तक इस रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और वर्ष 2011-12 की रिपोर्ट से नये सीरीज के आंकड़ों की तुलना नहीं की जा सकती है। 

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने इस लीक रिपोर्ट पर संवाददाताओं से चर्चा में साफ किया कि वर्ष 2012-12 की पंच वर्षीय रिपोर्ट और वर्तमान में तैयारी की जा रही तिमाही रिपोर्ट की तुलना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अभी इस रिपोर्ट का प्रारूप तैयार किया गया है , इसको अंतिम रूप नहीं दिया गया है। 

श्री कुमार ने कहा कि वर्ष 2012-12 में पांच वर्षीय रिपोर्ट तैयार होती थी लेकिन जुलाई 2017 में नये सिरे से रिपोर्ट तैयार करने की शुरूआत की गयी। इसमें डाटा संग्रह में भी बदलाव किया गया है। पहले मात्र दो तरह के आँकड़े संग्रहित किये जाते थे लेकिन अब इसमें शैक्षणिक आधार को भी शामिल किया गया है। अब तिमाही अाधार पर आंकड़े तैयार किये जा रहे हैं। जुलाई 2017 से जुलाई 2018 तक की रिपोर्ट तैयार है लेकिन वर्ष 2018 की जुलाई सितंबर एवं अक्टूबर दिसंबर तिमाही के आंकड़े अभी संग्रहित किये गये हैं। अभी उसका विश्लेषण किया जायेगा और फिर तब रिपोर्ट तैयार की जायेगी। 

श्री कुमार ने कहा कि अभी ग्रामीण क्षेत्रों की रिपोर्ट वार्षिक आधार पर तथा शहरी क्षेत्रोें की रिपोर्ट तिमाही आधार पर तैयार की जा रही है। जब जुलाई सितंबर 2018 की रिपोर्ट तैयार हो जायेगी तब उसकी तुलना जुलाई सितंबर 2017 की रिपोर्ट से की जा सकती है। यह रिपोर्ट मार्च तक जारी किये जाने की संभावना जताते हुये उन्होंने कहा कि नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता गठित कार्यबल की सिफारिशों के आधार पर नये सीरीज के आंकड़े जारी किये जायेंगे। 

विपक्षी कांग्रेस और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आ गयी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जहाँ इस रिपोर्ट में आये रोजगार के आँकड़ों को ‘राष्ट्रीय त्रासदी’ करार दिया है, वहीं भाजपा ने इसे ‘फेक न्यूज’ बताते हुये श्री गाँधी की समझ पर सवाल उठाया है।

उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्ष में औसत विकास दर सात प्रतिशत रही है और वर्तमान मूल्य पर यह दर 11 से 12 प्रतिशत है। आर्थिक विकास गतिविधियों में तेजी के बावजूद ऋण उठाव सुस्त है जिससे यह तय है कि निजी क्षेत्र में रोगजार सृजन कम हो रहा है। लेकिन यह रोजगार विहीन विकास नहीं है। कहीं ना कहीं तो रोजगार सृजित हो रहा है। 

श्री कांत ने रोजगार के आंकड़े देते हुये कहा कि नीति आयोग के आतंरिक विश्लेषण के अनुसार मार्च 2018 तक एक वर्ष 78 लाख रोजगार सृजित हुये हैं। हालांकि गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर कम सृजित हो रहे रहे हैं। उन्होंने ओला और उबर जैसे प्लेटफार्म का उल्लेख करते हुये कहा कि सिर्फ परिवहन क्षेत्र में पिछले चार वर्ष में रोजगाार में भारी बढोतरी हुयी है। इन दोनों प्लेटफार्म से करीब 32 लाख से अधिक लोग जुड़े हुये हैं। 

उन्होंने कहा कि जब तक तिमाही आधार पर आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन नहीं किया जाता तब तक बेरोजगारी के आंकड़े को सही नहीं कहा जा सकता है। इस संबंध में एक दो महीने में जब रिपोर्ट आयेगी तक इसकी तुलना की जा सकती है।




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