कृषि संकट, बेरोजगारी, विभाजनकारी ताकतें सबसे बड़ी चुनौती: मनमोहन Agriculture crisis, unemployment, divisive forces biggest challenge: Manmohan



नयी दिल्ली ।  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कृषि संकट, बेरोजगारी और पर्यावरणीय क्षरण को भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौती करार देते हुए रविवार को कहा कि इनका असर समाज पर पड़ रहा है।

डा. सिंह ने यहां एक शिक्षण संस्थान में एक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली के गलत क्रियान्यवन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को करारा झटका दिया है। सरकार के इन दोनों कदमों से छोटे और असंगठित कारोबार की कमर टूट गयी है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कहा कि औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र के विकास लिए सुनियोजित नीति और क्रियान्वयन की बेहतर रणनीति आवश्यक है। उन्होेंने कहा कि गहराता कृषि संकट, रोजगार के घटते अवसर, पर्यावरणीय क्षरण और विभाजनकारी ताकतें भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनाैतियां हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “ किसानों की आत्महत्यायें और उनके लगातार विरोध प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था के असंतुलित विकास को दर्शाते हैं। इनका गहरायी से विश्लेषण करने और राजनीतिक रुप से समाधान करने की जरुरत है। ”
उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के रफ्तार नहीं पकडने से रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा नहीं हो रहे हैं। रोजगार रहित विकास वास्तव में रोजगार खत्म करने वाला विकास साबित हो रहा है। इससे युवाओं में आक्रोश बढ़ रहा है।



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