सेना ने युद्ध के साजोसामान की प्रदर्शिनी लगायी Army organized exhibition of war accessories



साहिबाबाद, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )  भारतीय सेना ने आज समाज में जागसकता एवं सेना के विषय में जानने के लिये इंदिरापुरम स्थित सिप्रा माल परिसर में युद्ध के दौरान काम आने बाले साजोसामान की प्रदर्शिनी लगायी तथा उसके विषय में लोगों को जानाकरी दी। प्रदर्शिनी का औपचारिक उदघाटन जिलाधिकारी ऋतु महेश्वरी ने की तथा सेना के बैंड ने राष्ट्रगीत की ध्वनि प्रस्तुत की। प्रदर्शिनी में पैदल सेना (इन्फैंट्री) के काम आने बोले हथियारों,जरूरी साज सामान और हल्के राकेट लांचा एवं तोपों को प्रर्दशन किया गया। इस प्रदर्शिनी की खास बात यह थी कि सेना के जवानों ने आम जनता को  हथियारों की पूरी जानाकरी देने के साथ उनको हाथों से छूने और उनके फोटो लेने की भी छूट दे रहे थे।
              
गौर तलव है कि पैदल सेना (इन्फैंट्री) भारतीय सशस्त्र बलों का एक अहम अंग है। देश की सुरक्षा में पैदल सेना का अहम योगदान रहा है। इसलिये इसे युद्ध की रानी भी कहा जाता है। पैदल सेना भारतीय थल सेना की रीढ़ की हड्डी के समान है। किसी भी युद्ध में पैदल सैनिकों की बड़ी भूमिका हुआ करती है। शारीरिक चुस्ती-फुर्ती, अनुशासन, संयम और कर्मठता पैदल सैनिकों के बुनियादी गुण हैं तथा इनके काम में आने बाले हथियार हों या अन्य साजोसामान या हल्की गन मशीन का युद्ध में इतना ही महत्व है। इसी महत्व को आम जन को बताने या कहिये जनता के फौज के साथ और नजदीकी लाने के लिये इस तरह की प्रदर्शनियों को विशेष महत्व है।
      
आज की प्रदर्शिनी में बहुचर्चित एवं एवं युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे करने बाली बोफोर्स तोप का प्रर्शन काफी महत्वपूर्ण था। इस तोप को देखने के लिये बच्चों से लेकर बड़े भी उत्सुक दिखे। तोप पर बैठने और उसके साथ सेल्फी लेने से लेकर युद्ध के समय कैसे चलती है इसे भी दिखाया गया। इससे छोटी तो रूस की बनी हुई 130 एमएम मोटर थी जिसकी मारक क्षमता 27किलोेमीटर है। इसके अलावा सैनिकों के कंधों पर युद्ध के मैदान में गरजेन वाली तोप 81एमएम थी जो दुश्मन को बर्बाद करने उसके चारों ओर धुंए के बादल बनाने और दुशमन पर रोशनी डाल कर उसे ढेर करने की क्षमता रखती है। एक मिनट में 20 सिंगल फायर करने वाली यह तोप 47.35 किलो बजनी है जिसे तीन जवान कंधे पर लेकर युद्ध के मैदान में मनचाही जगह नी स्थापित करते हैं। तोपों के अलावा प्रदर्शिनी में सैनिकों की सुरक्षा और युद्ध में दुश्मन को दिन या रात में देखने के थर्मल इक्यूपमेंट वर्दी हैल्मेंट आदि के अलावा हल्की और कारगर एके 47 जैसी रायफल के अलावा अन्य लम्बी दूरी तक दुश्मन को भेदनी वाली रायफलों को दर्शाया दगया था।
        
युद्ध के दौरान काम आने वाली सबसे महत्वपूर्ण है संदेश बाहक डिवीजन यानी जिसे सिंगनल कोर कहते है का भी प्रदर्शन किया गया था।ं इसके अलावा सेना के विषय में जानकारी देने के लिये आडियो विजुअल सिस्टम भी लगाया गया था जिसमें सिनेमा के जरिये सेना के काम को दिखाने व युवाओं को प्रोत्साहित किया जा सके। काय्रक्रम के दौरान जिलाधिकरी गांजियाबाद रितु माहेश्वरी के आगमन पर सेना के बैंड ने स्वागत ध्वनि बजायी तथा बाद में राष्ट्रगीत जनमनगन की संगीतमयी ध्वनि प्रस्तुत की। इस अवसर पर सेना के पूर्व कर्नल शैलेन्द्र सिंह व मेजर सोमबीर सिंह आदि उपस्थित थे।


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