दिव्य कुंभ - भव्य कुंभ को साकार कर रहा श्रद्धालुओं का जन सैलाब Divine Kumbh - Mass Kumbh of pilgrims making the grand Kumbh



बसंत पंचमी पर दो बजे तक त्रिवेणी में दो करोड़ ने लगाई आस्था की डुबकी

संजय त्रिपाठी कुम्भ नगरी से 
कुम्भ नगर । दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ मेले में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर रविवार को तीसरे और अंतिम शाही स्नान के दौरान दोपहर दो बजे तक करीब दो करोड़ श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके थे। आज रात तक यह संख्या चार करोड़ से भी ऊपर पहुंच सकता है। 

शनिवार से ही यहां श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। लोग संगम तट पर सुबह चार बजे से ही संगम में डूबकी लगाना शुरू कर दिये थे। दूर - दराज से से आये लोगों के अलग - अलग परिवेश बोल - चाल और भाषा भारतीय संस्कृति का एक अनोखा झलक कुंभ नगरी में दिखा रहा हैं। टेंट और तंबुओं से ढका इस मेला क्षेत्र में भक्ति - भजन के साथ सुबह से ही हवन - पूजन और भागवत भजन का कार्य शुरू हो जाता है। चारो तरफ टेंट के इस शहर में देश भर के ऋषि - महात्माओं का पंण्डाल लगा है, जहां मेले में आने वालों के लिए खाना - पानी से लेकर ठहरने तक की व्यवस्था की गई है। 

मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिला से आये श्रद्धालु मोहन सिंह राठौर कहना है कि हम लोग के साथ 10 परिवार गंगा स्नान के लिए आया है। उन्होंने बताया कि अभी रहने की व्यवस्था नहीं हुई है, लेकिन बातचीत चल रही है। कुछ देर में व्यवस्था हो जायेगी। उन्होंने बताया कि इस बार मेले में जो सुविधाएं प्रशासन के तरफ से मुहैया कराया गया है, वह दूर - दराज से आये श्रद्धालुओं के लिए बहुत ही अच्छा है। इससे पहले भी एक बार यहां के मेला में आ चुका हूं, लेकिन इस बार बहुत कुछ बदला सा दिखाई दे रहा हैं। इसी तरह वहीं के रामदरश केवट भी अपने 19 महिला - पुरूष साथियों के साथ मेला में आये हुए है। वे सेक्टर - 4 के संगम तट पर स्नान कर अपने साथियों के साथ घर से लाये भोजन खा रहे थे। उनका कहना है कि कल भी वसंत पंचमी के मौके पर स्नान करने के बाद एक सप्ताह तक हम लोगों का यहां रूकने की इच्छा है। वह अवधेशानन्द गिरी का खालसा में ठहरे हुए हैं। 


बिहार के कटिहार जिला के रामचरीत्र शर्मा और गिरीजा शर्मा भी अपने परिवार के साथ मेला में कल्पवाश करने आये हुए है। दोनों ने मेला की भव्यता और सरकार द्वारा उपलब्ध कराइ्र गई सुविधाओं की भरपूर प्रशंसा की । उन्होंने बताया कि ऐसी सुविधा हरिद्वार और उज्जैन के कुम्भ मेला में भी देखने को नहीं मिली थी। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, शौचालय की व्यवस्था तथा रहने की व्यवस्था की तारीफ की। इस मौके पर दिल्ली से गंगा स्थान के लिए आये नितिन जैन, स्वर्ण भाटी, विजय पांण्डेय और नितिन माथुर की टीम मेला में श्रद्धालुओं की अस्था और टेंट के पंडालों को देखकर हैरान थे। इन सभी का कहना था कि वास्तव में प्रयागराज में पूरा देश समाया हुआ है। इस तरह की व्यवस्था हैरान कर देने वाली है। सही में यह दिव्य कुंभ - भव्य कुभ को सार्थक करने वाला है। 
मेला अधिकारी विजय किरण आनंद ने ज्योतिषियों के हवाले से कहा कि बसंत पंचमी स्नान का मुहूर्त शनिवार सुबह 8.55 बजे से रविवार सुबह 10 बजे तक रहा। शनिवार रात 10 बजे तक करीब एक करोड़ लोगों ने संगम क्षेत्र में स्थित 40 घाटों पर स्नान कर पुण्यलाभ अर्जित किया था जबकि लगभग उतनी ही संख्या में श्रद्धालुओं ने रविवार दोपहर दो बजे तक स्नान किया है। श्रद्धालुओं के स्नान करने का क्रम अनवरत जारी है।

श्री आनंद ने बताया कि देश विदेश के कोने-कोने से आये करोड़ों श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं ने हर हर गंगे के उदघोष के साथ विभिन्न घाटों पर स्नान किया। संगम की रेती पर आस्था का सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस दौरान हेलीकाप्टर से की जा रही पुष्पवर्षा का मनोरम नजारा कुंभ की महिमा का बखान कर रहा था। 

शनिवार को दिन में सर्द तेज हवा मानो श्रद्धालुओं की आस्था की परीक्षा ले रहा हो। रात के गहराने के साथ साथ सर्द हवा अपना दामन फैलाती गयी। संगम की विस्तीर्ण रेती पर खुले अम्बर के नीचे चादर ओढ़े कंपकंपाते श्रद्धालु भोर की प्रतीक्षा कर रहे थे। भोर होते ही श्रद्धालुओं का त्रिवेणी में डुबकी माने का क्रम शुरू हो गया। जैसे जैसे भगवान भास्कर का उदय हो रहा था मौसम सुहावना बनता जा रहा था। दोपहर चटख धूप में संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के रेले में तेजी देखी गयी।
                                                                      अगले अंक में पढ़े कुम्भ मेला में कल्पवास की कहानी



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