जुमलों से भरे अंतरिम बजट ने मजदूरों को दिया धोखा An interim budget filled with duplicity gave the workers cheating



  • 3000 पेंशन बेहद कम, सरकार ने मज़दूरों पर ही थोपी जमा करने की ज़िम्मेदारी
  • मजदूरों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने के लिए सरकार को कोई चिंता नहीं


नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया अंतरिम बजट 2019 पूर्णतः कॉर्पोरेट के पक्ष में है और ग्रामीण गरीब, मजदूर और किसान विरोधी है| इसी लिए उसकी कॉर्पोरेट प्रमुखों द्वारा सराहना की जा रही है| ज्ञात हो कि बजट में प्रस्तावित सरकारी उपक्रमों का विनिवेश और उनका निजीकरण करने से नौकरी बाज़ार में भारी दबाव पड़ेगा| सरकार ने फिर बेरोज़गारी को कम करने के लिए कुछ नहीं किया, उलटे उसने एन.एस.एस.ओ की रिपोर्ट के बेरोज़गारी दर बढ़ने सम्बंधित आकड़ों को छुपाने की कोशिश की| ज्ञात हो कि भाजपा सरकार देश मे 10 करोड़ नए रोजगार दिये जाने का वादा करके आई थी, परंतु रेपोर्टों के मुताबिक आज देश मे बेरोजगारी दर 45 साल मे सबसे ज्यादा है| परंतु, इस ओर जुमलेबाजी के अलावा सरकार ने कोई भी कदम नहीं उठाया है| इसके विपरीत, सरकार श्रम बाज़ार की मांगों के अनुसार नौकरियों कि संख्या को नहीं बढ़ा रही है| साथ ही, शहरी गरीबों की समस्याग्रस्त स्थिति को सुधरने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया गया है|

ज्ञात हो की अंतरिम बजट में उन किसानों जिनके पास कुछ संपत्ति है उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए तो कदम उठाये गये हैं, परन्तु ग्रामीण गरीबों की ज़रूरतों को पूरी तरह से नज़रंदाज़ किया गया है| किसानों के लिए प्रति अपनी झूठी सहनशीलता दिखाते हुए केंद्र सरकार ने प्रति परिवार 6000 रुपए देने की बात कही है, जो कि मात्र 500 रुपए महीना है या प्रति परिवार 3 रुपए प्रतिदिन है| साथ ही यह राशि खेत मजदूरों को नहीं मिलेगी जो खेतिहर समाज मे सबसे बड़ा हिस्सा हैं| बेरोजगारी को खत्म करने के लिए कोई घोषणा तो की नहीं गयी है, उल्टे मनरेगा के लिए भी आवंटित राशि मे पिछले साल द्वारा खर्च के मुकाबले कमी की गयी है| साथ ही, असंगठित क्षेत्र के 60 साल के ऊपर के मजदूरों को 3000 रूपये की पेंशन की घोषणा की गयी है| यह बेहद ही कम राशि है, जिससे देश मे करोड़ों मजदूरों को कोई भी फायदा नहीं होने वाला है| साथ ही, इसके लिए हर मजदूर को प्रतिमाह खुद ही पैसे जमा करने होंगे| ज्ञात हो कि चुनावी घोषणाओं से ज्यादा मजदूरों को अनौपचारिक क्षेत्र से निकालने की ज़रुरत है, और उन्हें सुरक्षित और स्थायी रोज़गार देने की ज़रुरत है|

बजट पूरी तरह से मजदूरों की सबसे महतवपूर्ण माँग- सभी को न्यूनतम मजदूरी सुनश्चित करने- को पूरी तरह नकारता है| साथ ही,मजदूरों के कल्याण के लिए जारी स्कीमों को भी लागू करवाने की कोई भी बात नहीं की गयी है| आने वाले दिनों में मजदूर एकता केंद्र भाजपा सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तीव्र करेगा|




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