नामवर पंचतत्व में विलीन, साहित्य जगत में शोक की लहर Nomar dissolves in Panchatattva, the wave of mourning in the literary world



नयी दिल्ली ।  हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष एवं प्रख्यात मार्क्सवादी चिन्तक नामवर सिंह का कल रात यहाँ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में निधन हो गया, वह 92 वर्ष के थे और उनके परिवार में पुत्र तथा पुत्री है।  उन्हें गत माह सिर में चोट लगने के कारण एम्स में भर्ती थे।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल समेत अनेक राजनेताओं ने श्री सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया और उनके अवसान को भारतीय साहित्य की दुनिया में अपूरणीय क्षति बताया है। 

साहित्य अकादमी, भारतीय ज्ञानपीठ, हिन्दी अकादमी, जनवादी लेखक संघ, प्रगति शील लेखक संघ, जनसंस्कृति मंच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है और साहित्य में एक युग का अवसान बताया है। 

श्री सिंह का बुधवार की शाम साढ़े चार बजे लोदी रोड शव दाह गृह में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि उनके पुत्र विजय सिंह ने दी। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लेखक पत्रकार और बुद्धिजीवी मौजूद थे। इनमें सर्वश्री विश्वनाथ त्रिपाठी, अशोक वाजपेयी, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव, हिन्दी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक चक्रधर, वर्तमान उपाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा, भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक मधुसुदन आनंद, आल इंडिया रेडियो के अपर महानिदेशक राजशेखर व्यास एन.सी.आर. टी. के. पूर्व निदेशक जगमोहन राजपूत, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय, जवाहर लाल नेहरु विश्विद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश सिंह, प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक हरीश त्रिवेदी, नित्यानद तिवारी, निर्मला जैन, सुधीश पचौरी, पत्रकार संतोष भारतीय, पत्रकार आशुतोष, एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार आदि प्रमुख हैं। भाकपा माकपा, हिन्दी अकादमी साहित्य अकादमी भारतीय ज्ञानपीठ और आल इंडिया रेडियो की तरफ से उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र भेंट किये गये।

पंडित हजारी प्रसाद दिवेदी के शिष्य श्री सिंह गत माह अपने घर पर आधी रात बिस्तर से गिर गये थे जिससे उनके सिर में चोट लग गयी थी। उन्हें एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था जहाँ वह कई दिन तक अचेतावस्था में रहे। बीच में वह थोडा ठीक भी हुए थे लेकिन कल रात 11 बजकर 51 मिनट पर उन्होंने अंतिम साँस ली। उनका जन्म 28 जुलाई 1927 को उत्तर प्रदेश के जीयनपुर में हुआ था। 
श्री सिंह की आरंभिक शिक्षा वाराणसी के क्वींस कालेज में हुई थी और उन्होंने हिन्दी में एम. ए. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से किया था। उन्होंने अपनी पीएचडी हिन्दी साहित्य में अपभ्रंश के योगदान पर किया था। 



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