खुल्लम - खुला : तू डाल - डाल, मैं पात - पात Put you - put me down



                                             खुल्लम - खुला 
कभी सुनते थे - तू डाल - डाल, मैं पात - पात । अब देखने को मिल रहा है। राजनीति भी कितनी कुत्ती चिज है अब जाकर पता चला। हालांकि कई वर्षो तक मैं भी राजनीति के पीछे भागा हूं, अपना बहुत कुछ बर्बाद भी किया हूं, लेकिन मिला वहीं झुनझुना का झुनझुना। जब 84 में हाई स्कूल पास किया था तब भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस बनने का भूत सवार था। उस समय अपने पिता जी के खिलाफ ही बीडीओ को चोरी - चुपके सरकारी सस्ते गले का राशन बेचने का आरोप लगा आवेदन दिया था। जांच भी हुई थी। पिता जी को उस समय एक मोटी रकम से चांदी का जूता मारना पड़ा। मुझे डांट - फटकार भी मिला। लेकिन गांव के लोगों ने मेरी खूब तारीफ की। मैं उस समय फूल कर कूपा हो गया। गांव के एक भाई भूषण तिवारी ने गांव के लोगों के सामने मेरी खिल्ली उड़ाते हुए कहा था कि जो देश बदलने की बात करता है, जो भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस बनने की बात करता है उसका बाप सरकारी जनता की राशन का कालाबाजारी करता है। पहले अपने घर से बदलाव की शुरूआत करे, तब तो कहा जायेगा कि इसके अंदर देश बदलने की इच्छाशक्ति है। फिर क्या था - मैंने लिखा एक बीडीओ के नाम पत्र और देकर राशन दुकान बंद कराने की मांग कर दी। वो भी एक समय था। उस समय के शिक्षक और उस समय के लेखक, कवि बच्चों में देशभक्ति की राग उनके रंगों में दौड़ा देते थे। इसी जुनून में गाजियाबाद आ गया और यहां भी करीब 22 वर्षो तक बदलाव का राग अलापता रहा। बदला तो कुछ नहीं, लेकिन मैं खुद बदल गया, मेरी वो विचार बदल गई। मैं भी लिखना किस विषय पर शुरू करता हूं और लेकर किस बात को बैठ जाता हूं। खैर, इस देश के राजनीति में हंगामा मचा है। लगता है चुनाव की तारीख का एलान शीघ्र ही होने वाला है। कोई विरोधियों को पाइप लाईन में लगाने में लगा है तो कोई प्रदेश से देश के क्षितिज पर छाने में लगा है। जिसके पास जितनी ताकत है, वह इस समय उतनी ताकत का प्रयोग कर रहा है। कुछ तो ताकत के सहारे इस तरह दबा देने में लगे है जो कभी उभर ही नहीं सके। कुछ लानत - मलानत करने में लगें है। कोई सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स, आदि ताकतों का इस्तेमाल कर रहा है तो कोई इसके काट में प्रदेश की अस्मिता का प्रश्न उठा रहा है। सबकी अपनी डफली और अपना राग है। बंगाल की ममता दी ने सबको हिला कर रख दिया। उन्होंने दिखा दिया कि बंगाल का पानी आज भी बंग - भंग के समय जैसा ही है, उसमें कोई केमिकल अभी नहीं मिला है। नागेश्वर राय की जाते - जाते की चाल कहा जाय या विरोधियों को सीबीआई पास में फांसने की मोदी की चाल कहा जाय, लेकिन वहां पड़ी उल्टा। उसने बता दिया कि तुम डाल - डाल हो तो मैं पात - पात हूं। देश के एक प्रदेश में गृह मंत्रालय को सीआइएसएफ की टुकड़ी भेजनी पड़ गई। इसी तरह ममता दी ने मरूती उद्योग लगाने का विरोध कर वामपंथी किला को ढहा मुख्यमंत्री बन बैठी । अब उनकी नजर दिल्ली की गद्दी पर लगी है ऐसा ही दिख रहा। आज संसद में भी मोदी ने चुटकी लेते हुए महागठबंधन को महामिलावट की संज्ञा दे डाली। अभी और भी उलट - पलट का अंदेशा लग रहा है। अभी तो चुनाव की शुरूआत है। आगे - आगे देखिए होता है क्या ? मजा लिजिए, चुनाव तक ऐसा ही इन्टरटेनमेंट होता रहेगा। चैकिए मत, आगे बहुत कुछ देखना है, बस आंखें स्क्रिन पर गडाये रखिए। धन्यवाद ! राम - राम !
संजय त्रिपाठी  



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