गेम के जकड़ मे नौनिहाल ! Junk in the game!



दुनिया भर के बच्चों में गेम के बढ़ते प्रभाव आज समाज के समक्ष एक चिंता की लकीर खींच दी है। कुछ साल पहले ‘ ब्लू व्हेल ’ ने कई जिंदगियां लील ली थी। पूरे विश्व में बच्चों के खत्म होते बचपन की घटनाओं से त्राहि - त्राहि मच गया था। अंत में इस गेम पर भी सख्ती से रोक लगाना ही पड़ा। आज एक बार फिर बच्चों में लोकप्रिय हो रहा आॅनलाइन गेम ‘पबजी’ (प्लेयरअननोन्स बैटलग्राउंड्स) के कई खतरनाक परिणाम सामने आ गये हैं। आप सोच रहे होंगे कि ‘ पबजी ’ गेम आखिर है क्या तो आइए इसके विषय में संक्षिप्त जानकारी देते है। पबजी एक ऑनलाइन गेम है जिसमे 100 खिलाड़ी एक विमान से एक बड़े टापू पर छलांग लगाते है। सब के सब फिर हथियार ढूंढकर एक दूसरे को मारना शुरू कर देते हैं। खिलाड़ी 4 लोगों का समूह भी बना सकते है। हर खिलाड़ी का अंतिम लक्ष्य जिंदा बचे रहना है। इसे खेलने का कोई खास नियम नही है। आपको बस विमान से छलांग लगानी है और हथियार ढूंढकर अपने विरोधी लोगो को मारना है। आप जो चाहे वो रणनीति अपना सकते है। इसमें कोई भी चाल गलत एवम धोखा नही है। बच्चो को इसकी लत तब तक नही लगती जब तक वे इसे केवल मनोरंजन के लिए खेलते है। परंतु जब वे बच्चे लेवल या गेम का एक भाग के लिए खेलना शुरू करते है तो उन्हें इसकी लत लग जाती है। उन्हें चिंता रहती है कि कहीं उनकी लेवल न घट जाए। इसलिए वे इसे पूरे दिन खेलने लग जातें हैं। इस तरह वे समाज से कट जाते है। देखा जाय तो यह एक नशा या लत का रूप ले लिया है। जो भी इसके पकड़ में एक बार आ जा रहा है, उसे इससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इस गेम ने अभिभावकों की नींद उड़ा दी है। हालांकि इसके बुरे परिणाम को देखते हुए सबसे पहले गुजरात सरकार ने इस गेम पर पाबंदी लगाया है । पिछले दिनों गाजियाबाद में रहने वाला दसवीं का एक छात्र इस गेम के चक्कर में अपना घर छोड़कर चला गया। इसी तरह महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में दो युवक ऑनलाइन गेम पबजी खेलने के दौरान ट्रेन की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। कुछ समय पहले दिल्ली के वसंतपुर क्षेत्र में पबजी गेम खेलने से मना करने पर एक लड़के ने अपने मां - बाप की हत्या कर दी। जलंधर में इस खेल का शिकार एक 15 वर्षीय लड़के ने अपने पिता के अकाउंट से पचास हजार रूपए निकाल लिये। मध्य प्रदेश के छिंदवाडा में एक युवक पबजी खेल में इस तरह व्यस्त था कि वह पानी के जगह एसीड पी गया। हालांकि बाद में उसे मरने से बचा लिया गया। जम्मू - कश्मीर में इसकी लत के शिकार एक जिम ट्रेनर ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया। रोज ऐसी घटनाएं सुनने में आ रही है। लंबे समय तक इस गेम में लगे रहने के कारण बच्चों के नीद गायब हो रहे हैं और उन्हें कई तरह की बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोबाइल गेम के लत को भी मनोरोग की श्रेणी में रखा है। स्वस्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस गेम के शिकार नोकरी पेशा युवा भी हो रहे हैं और प्रतिदिन मनोचिकित्सकों के पास काउंसलिंग के लिए जा रहे है। यह गेम चीन की देन है, लेकिन चीन ने 13 वर्ष के कम उम्र के बच्चों के खेलने पर प्रतिबंध लगा रखा है। भारत में भी इस गेम पर सख्ती से रोक लगाने के लिए पहल करना होगा, नही ंतो नई पीढ़ी का बचपन इस गेम के भेट चढ़ जायेगा। 



Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment