एक नहीं रह सके कांग्रेस विरोधी दल, इंदिरा ने की वापसी One can not remain Congress anti-Congress, Indira returns



इतिहास के झरोंखो से - 
नयी दिल्ली    (अरुण कुमार सिंह से)   आपातकाल के बाद एकजुट हुये दलों में टूट तथा सत्ता से बेदखल होने के बाद तरह तरह की राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही ‘आयरन लेडी’ इंदिरा गांधी के जनता से सीधे जुड़ने के अभियान का 1980 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस (आई) को फायदा मिला और वह भारी बहुमत से फिर से सत्ता में आ गयी। 
सातवें आम चुनाव के पहले राष्ट्रीय पार्टियों में कांग्रेस (आई) और कांग्रेस (यू) , जनता पार्टी और जनता पार्टी (एस) का गठन हो चुका था । वर्ष 1977 में पहली बार सत्ता का सुख भोगने वाले समाजवादियों में बिखराव हो गया था इनके कुछ नेता जनता पार्टी और जनता पार्टी (एस) में बंट गये थे । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपना अस्तित्व बनाये हुये थी जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने सांगठनिक स्थिति को मजबूत बनाया था जिसका फायदा उसे चुनाव में मिला था । 

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट पर इंदिरा गांधी का मुकाबला करने के जनता पार्टी की ओर से विजयराजे सिंधिया चुनाव मैदान में उतरी थी लेकिन मुकाबले में कही टिक नहीं सकी । कांग्रेस (आई) के टिकट पर चर्चित युवा नेता संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट पर चुनाव जीता। राजनीति पर अद्भुत पकड़ रखने वाले जगजीवन राम ने जनता पार्टी के टिकट पर निर्वाचित हुयें थे । 

राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा इस चुनाव में राज्य स्तरीय पार्टियों में द्रमुक , अन्नाद्रमुक , फारवर्ड ब्लाक , आल इंडिया मुस्लिम लीग , मुस्लिम लीग , महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी , पीपुल्स कांफ्रेंस , पीजेंट एंड वर्क्स पार्टी , अकाली दल आरएसपी समेत कुल 19 पार्टियों ने चुनाव लड़ा था । उस समय कुल 11 निबंधित पार्टियां थी जिनमें भारतीय सोसलिस्ट पार्टी , झारखंड पार्टी तथा शिवसेना प्रमुख थी । 

लोकसभा की 542 सीटों में से 422 सामान्य श्रेणी की थी जबकि अनुसूचित जाति के लिए 79 और अनुसूचित जनजाति के लिए 41 सीट सुरक्षित थीं । इस चुनाव में 542 में से 529 सीटों के लिए ही चुनाव हुआ था जिसमें 4629 उम्मीदवारों ने अपनी चुनावी किस्मत आजमायी। इस चुनाव में 35 करोड़ 62 लाख से अधिक मतदाताओं में से 56.92 प्रतिशत ने मतदान किया था । अधिकतम 39 उम्मीदवारों ने चंडीगढ से चुनाव लड़ा था । 

कांग्रेस (आई) ने सबसे अधिक 492 ,जनता पार्टी ने 433 , जनता पार्टी (एस) ने 293 , कांग्रेस (यू) ने 212 , भाकपा ने 47 तथा माकपा ने 64 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया था । कांग्रेस (आई) को 42.69 प्रतिशत वोट मिले और उसके 353 प्रत्याशी चुनाव जीते थे । जनता पार्टी (एस) के 41 तथा जनता पार्टी के 31 प्रत्याशी निर्वाचित हुये थे । भाकपा के 10 , माकपा के 37 तथा कांग्रेस (यू) को 13 लोकसभा क्षेत्रों में सफलता मिली थी । 

कांग्रेस (आई) को उत्तर प्रदेश में 51 , बिहार में 30 , आन्ध्र प्रदेश में 41 , असम में दो , गुजरात में 25 , हरियाणा में पांच , हिमाचल प्रदेश में चार , कर्नाटक में 27 , जम्मू कश्मीर में एक , केरल में पांच , मध्य प्रदेश में 35 , महाराष्ट्र में 39 , उड़िसा में 20 , पंजाब में 12 , राजस्थान में 18 , तमिलनाडु में 20 , पश्चिम बंगाल में चार , दिल्ली में छह , अरुणाचल में दो , मणिपुर , अंडमान निकोबार , चंडीगढ़ , दादर नागर हवेली , और पुड्डुचेरी में एक - एक सीट मिली थी । 

जनता पार्टी (एस) को उत्तर प्रदेश में 29 , बिहार में पांच , हरियाणा में चार , उड़िसा में एक और राजस्थान में दो सीटें मिली थी । जनता पार्टी को बिहार में आठ , महाराष्ट्र में आठ , मध्य प्रदेश में चार , उत्तर प्रदेश में तीन तथा कर्नाटक , दिल्ली , गुजरात , और हरियाणा में एक - एक सीट मिली थी । भाकपा को बिहार में चार , पश्चिम बंगाल में तीन , केरल , मणिपुर और उत्तर प्रदेश में एक - एक सीट मिली थी । कांग्रेस (यू) को बिहार में चार , आन्ध्र प्रदेश में एक , गोवा दामन दीव में एक , जम्मू कश्मीर में एक , केरल में तीन , महाराष्ट्र , राजस्थान और लक्ष्यदीप में एक - एक सीट मिली थी । 

तमिलनाडु में द्रमुक को 16 तथा अन्नाद्रमुक को दो , फारवर्ड ब्लाक को पश्चिम बंगाल में तीन , आरएसपी को पश्चिम बंगाल में चार तथा अकाली दल को पंजाब में एक सीट पर सफलता मिली थी । निर्दलीय उम्मीदवारों को बिहार में दो , जम्मू कश्मीर , केरल , मध्य प्रदेश , मिजोरम , नागालैंड , तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में एक - एक सीट पर कामयाबी मिली थी । 

रायबरेली में इंदिरा गांधी ने 223903 वोट लाकर जनता पार्टी की उम्मीदवार विजयराजे सिंधिया को पराजित किया था । श्रीमती सिंधिया 50 हजार से कुछ अधिक मत प्राप्त कर सकी थी । अमेठी में संजय गांधी ने जनता पार्टी के ही रविन्द्र प्रताप सिंह को हराया था । श्री गांधी को 186990 और श्री सिंह को 58445 वोट मिले थे । बिहार में जनता पार्टी के टिकट पर जगजीवन राम ने कांग्रेस (आई) के महावीर पासवान को हराया था । 

इलाहाबाद सीट पर कांग्रेस (आई) के विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 153062 मत लाकर जनता पार्टी (एस) के लक्ष्मी भूषण वाष्णेय को परास्त किया था । बलिया में चन्द्रशेखर जनता पार्टी के टिकट पर और बागपत में चरण सिंह जनता पार्टी (एस) के टिकट पर जीते थे । बिहार के बांका लोकसभा क्षेत्र में जनता पार्टी (एस) के उम्मीदवार रहे मधु लिमिये कांग्रेस (आई) केे चन्द्र शेखर सिंह से चुनाव हार गये थे । मधु लिमिये को 95358 और श्री सिंह को 171781 वोट मिले थे । छपरा सीट पर जनता पार्टी के उम्मीदवार सत्यदेव सिंह ने जनता पार्टी (एस) के प्रत्याशी लालू प्रसाद यादव को पराजित किया था । श्री सिंह को 160054 तथा श्री यादव को 151273 मत मिले थे । कटिहार में कांग्रेस (आई) के तारिक अनवर , मुजफ्फरपुर में जनता पार्टी (एस) के जार्ज फर्नाडीस और हाजीपुर में जनता पार्टी (एस) के ही रामविलास पासवान जीत गये थे । 

उत्तर प्रदेश के गढवाल सीट पर कांग्रेस (आई) के हेमवती नन्दन बहुगुणा ने जनता पार्टी के प्रताप सिंह पुष्पन और नैनीताल में कांग्रेस (आई) के ही नारायणदत्त तिवारी ने जनता पार्टी के भारत भूषण को पराजित किया था । पश्चिम बंगाल में जादवपुर सीट पर माकपा के सोमनाथ चटर्जी और बसीरहाट में माकपा के दिग्गज इन्द्रजीत गुप्त निर्वाचित हुये थे। 

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जनता पार्टी (एस) के मनोहर लाल , सोनीपत में जनता पार्टी (एस) के ही देवीलाल और भिवानी में कांग्रेस (आई) के बंशीलाल ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराया था । मध्य प्रदेश में गुना से कांग्रेस (आई) के माधवराव सिंधिया और छिंदवाड़ा में इसी पार्टी के कमलनाथ निर्वाचित घोषित किये गये थे । महाराष्ट्र के राजपुर सीट पर जनता पार्टी के उम्मीदवार मधु दंडवते ने कांग्रेस (आई )के प्रत्याशी एस एन देसाई को पराजित किया था। 


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