खुल्लम - खुला : वादा तेरा - वादा, वादे पे तेरे मारा गया



                                               खुल्लम - खुला
वादा का भी अपना अलग ही रंग है। खासतौर से प्रेमी - प्रमिका एक - दूसरे से प्रेम की पिंग बढ़ाने के लिए वादा करते है। कुछ में तो चांद - तारे तक तोड़ कर लोन के लिए भी वादा किया जाता है ऐसा भी सुनने को मिलता हैं। एक बार एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के पिता से उसका हाथ मांगने जा पहुंचा। जब प्रेमिका के पिता ने अपनी बेटी से पूछा - बेटी ! रोज इन्हीं से मिलाने की बात करती थी। बेटी ने जवाब देते हुए कहा - हां, पापा ! मैं इनसे प्रेम करती हूं और हम दोनों शादी करना चहते है। ठीक है बेटी, जब तुने शादी करने का निर्णय पहले ही कर चुकी है तो भला मैं क्यों मना करूंगा। मेरे मना करने के बाद तुम दोनों भाग जाओं ओर फजीहत होगी मेरी। इससे अच्छा तुम दोनों शादी के बंधन में ही बंध जाओ। प्रेमिका के पिता ने अपनी बेटी के प्रेमी से पूछा - तुम मेरी बेटी के लिए क्या - क्या कर सकते हो ? प्रेमी ने शादी के बंधन में बंधने की खुशी मे दूना जोश में कहा - मैं इसके लिए सबकुछ कर सकता हूं । ये कहे तो आकाश से चांद - तारे भी तोड़ कर ला सकता हूं ! प्रेमिका के पिता ने डपटते हुए कहा - चुप ....! शर्म नहीं आती। केजरीवाल के तरह जो मन में आता है वहीं कहता है। झूठ बोल रहा। तू चांद - तारे तोड़ कर ला सकता है ? अरे भले मानस यह कहता कि मैं इसके लिए समोसे ला सकता हूं, चाऊमीन ला सकता हूं, चाट ला सकता हूं, तब तो भला मैं मान भी जाता । लेकिन जो तुझसे होगा नहीं उसे भी लाने को कह रहा। बेटी इसके झांसे में आ गई तो जिंदगी भर मोदी के किए वादे का इंतजार करती ही रहेगी। इससे अच्छा कोई और लड़का ढूढ़ मैं भी तेरा साथ दूंगा। असल में प्रेमी - प्रेमीका का वादा दिल से निकलता है, लेकिन आज कल नेताओं द्वारा भी मतदाता - प्रेमिका से वादा जोरशोर से किया जा रहा है। वह भी वादा में मारी जाती है, और यह प्रेमिका भी 15 लाखटकिया तथा 72 हजरिया वादा में मारी जा रही है। नेताओं का वादा दिल से नहीं दिमाग से निकलता है। प्रेमिका तो भावुक होती है, कोई भी वादा हो उन्हें लगता है, मेरा सबसे अनोखा प्रेमी अपनी वादा का हर हाल में पूरा कर ही देगा। अभी तो वादो का सिलसिला शुरू हुआ है, चंुनाव के अंतिम मोड़ तक यह कहां तक पहुंच जायेगा कोई नहीं जानता। हर प्रेमिका को अपना प्रेमी सबसे बेहतर लगता है, लेकिन जो जवानी के मोड़ पर तो पहुंच गए हैं और अभी तक इल्लू - इल्लू की ए,बी, सी, डी शुरू नहीं किये है उन्हें अपने लिए ऐसे वादा को परखने में मुश्किल होता है। जनता भी हर पांच साल में ऐसी स्थिति से ही गुजरती हैं। कुछ अपने प्रमिका को पकड़ कर हमेशा ही बांधे रखते हैं, उन्हें चांद - तारे तोड़ कर लाने पर भी विश्वास है। क्योंकि उनका प्रेमी खास है। मुझे तोयाद आता है किशोर कुमार की - वादा तेरे वादा - वादा पे तेरे मारा गया .................... ! 
संजय त्रिपाठी     



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