मजदूर संगठनों ने भाजपा सरकार के मजदूर-विरोधी कदम के खिलाफ जंतर-मंतर पर किया विरोध प्रदर्शन Labor organizations protest against Jantar-Mantar



  • 44 श्रम कानूनों में बदलाव कर उन्हें 4 कानूनों में सिमटाने की भाजपा सरकार की कोशिश
  • मौजूदा श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करने और श्रम कानूनों में सभी मजदूरों को बराबरी सुनिश्चित करने की मांग उठाई


नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  आज वर्कर्स यूनिटी सेंटर, इंडिया (डब्लू.यू.सी.आई) के कार्यकर्ताओं ने अन्य मजदूर संगठनों जिनमें आईएमके, आईएफटीयू, आईएमएस आईसीटीयू एवं एनटीयूआई  शामिल थे, उनके साथ मिलकर जंतर-मंतर पर श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों के विरोध में प्रदर्शन किया।
ज्ञात हो कि सत्तारूण भाजपा सरकार द्वारा श्रम कानूनों का सरलीकरण करने के नाम पर श्रम कानूनों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र सरकार की मंशा के तहत 40 से अधिक श्रम कानूनों को मात्र 4 कानूनों में सिमटाया जा रहा है। इस मजदूर-विरोधी योजना के पीछे सरकार व्यापार को बढ़ावा देने का बहाना बना रही है, जबकि इसके जरिए पूंजीपति वर्ग को मजदूरों का और भी अधिक शोषण करने का अवसर दिया जाएगा।
ज्ञात हो कि मौजूदा समय में भारत का कामगार वर्ग अतिशोषणकारी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर है। आज भी बिनी किसी सुरक्षा के मानकों के पालन के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से भी नीचे काम करने को मजबूर होना पड़ता है। छोटी फैक्ट्रियों में तो सिर्फ न्यूनतम मजदूरी का ही नहीं अन्य श्रम कानूनों का भी खुलेआम उल्लंघन किया जाता है। कम दाम में ज्यादा काम छोटी फैक्ट्रियों में बेहद आम है, जहां न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन पर मजदूरों को 12-14 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। मजदूर बेहद कठिन काम भी बिना किसी सुरक्षा साधनों के करने को मजबूर हैं। आये दिन श्रम कानूनों में बदलाव कर के पूंजीपतियों का मुनाफा बढाया जा रहा है। हर क्षेत्र में ठेकेदारी प्रथा बढ़ी है जिसके कारण ृकंपनियां अपनी मनमर्जी से मजदूर को काम से निकल सकती है। ज्ञात हो देशी-विदेशी कम्पनियाँ श्रम कानूनों को पूरी तरह दरकिनार कर मजदूरों का शोषण कर रही हैं, जिसमे केंद्र सरकार उसका साथ दे रही है। प्राइवेट कंपनियों से नियंत्रण हटाने के नाम पर असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे भारत के बहुसंख्यक कामगारों को अति-शोषित करना और आसान किया जा रहा है।
डब्लू.यू.सी.आई भाजपा सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों की कड़ी निंदा करती है। साथ-ही-साथ यह मांग करती है कि सभी मजदूरों को कानून के समक्ष बरारबी का दर्जा हासिल हो तथा सभी अधिकार दिये जाये। डब्लू.यू.सी.आई ऐलान करता है कि आने वाले समय में भाजपा सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन को तीव्र किया जाएगा।



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